हितेश पंत (नई दिल्ली)
आज दुनिया पानी बचाने का संकल्प ले रही है। मौका ही ऐसा खास है कि पानी जैसे गंभीर मुद्दे पर आज हर कोई सजग दिख रहा है। खुले आम पानी की बर्बादी करने वाले भी आज पानी के संरक्षण पर लोगों को सचेत करते दिख जाएंगे। जल संरक्षण के प्रति सचेत रहना कितना जरूरी है ये इस बात स्पष्ट होता है कि दुनिया के साथ भारत में भी स्वच्छ जल का संकट मंडराने लगा है।
आज विश्व जल दिवस है। इसलिए पानी बचाने को लेकर बड़ी बड़ी बातें हो रही हैं। लेकिन शायद लोग जल संरक्षण को लेकर अभी सजग नहीं हैं। आंकड़ें तो कुछ इसी ओर इशारा करते हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की पत्रिका डाउन टू अर्थ में पानी के संकट को लेकर एक रिपोर्ट जारी हुई है। रिपॉर्ट में ये खुलासा हुआ है कि दुनिया के करीब 200 शहर गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। दुनिया के करीब 10 बड़े शहरों में डे जीरो का खतरा सर पर मंडराने लगा है, जिसमें बेंगलुरु भी शामिल है। डे जीरो में नलों से पानी आना बंद हो जाता है।
एक अनुसार दुनियाभर में 84.4 करोड़ लोग साफ पानी के लिए तरस रहे हैं। भारत में भी ये आंकड़ा गंभीर होता जा रहा है। देश में करीब 16.3 करोड़ लोगों के पास साफ पानी की सुविधा नहीं है। इसका प्रमुख कारण लगातार बढ़ता प्रदुषण और भूजल की मात्रा में कमी आना है। सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण का कहना है कि बेंगलुरु और चैन्नई के हालात केप टाउन जैसे होने लगे हैं। जो हर तरह से समृद्ध होने के बावजूद गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं।
रिपोर्ट में और भी कई खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान हालात के अनुसार साल 2050 तक दुनिया की करीब 36 फीसदी आबादी पानी की गंभीर समस्या से जुझने लगेगी। इसके साथ ही 2050 तक शहरों में पानी की मांग 80 फीसदी तक ज्यादा होगी। जल संरक्षण को लेकर आज दुनियाभर में जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। देश में भी नेताओं से लेकर बड़ी हस्तियां पानी बचाने की अपील कर रही हैं। लेकिन ये जिम्मेदारी हमारी है कि हम किस तरह से पानी को बचत करते हैं और आने वाले समय के लिए जल संरक्षण में कितनी जिम्मेदारी निभाते हैं।