हितेश पंत (नई दिल्ली): पवित्र अमरनाथ यात्रा की बुधवार को विधि-विधान के साथ शुरूआत हो गई। कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में स्थित प्रसिद्ध अमरनाथ गुफा में बर्फ से बने प्राकृतिक शिवलिंग का दर्शन करने के लिए इस बार करीब 2 लाख लोगों ने पंजीकरण कराया है। जम्मू कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के बीच सरकार ने यात्रा के कड़े इंतजाम किए हैं। यात्रा रूट की निगरानी का जिम्मा सेना, सीआरपीएफ के साथ एनएसजी कमांडोज को भी दिया गया है।
देश में आस्था की प्रतीक अमरनाथ यात्रा के लिए आज पहला जत्था रवाना किया गया। जम्मू के भगवती नगर स्थित बेस कैंप से जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस जत्थे में कुल 1904 श्रद्धालु शामिल हैं। जिनमें 320 महिलाएं और 20 बच्चे भी हैं। ये जत्था कश्मीर स्थित बेस कैंप बालटाल और पहलगाम पहुंचेगा। इसके बाद पवित्र गुफा के लिए पैदल यात्रा शुरू होगी।
इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए 2.11 लाख श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। ये यात्रा अगले 40 दिनों तक चलेगी और 26 अगस्त को यात्रा का समापन हो जाएगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ श्राइन बोर्ड हर रोज 7500 यात्रियों को ही आने जाने की इजाजत दे रहा है। यात्रियों के प्रीपेड मोबाइल की वैधता भी इस बार 10 दिनों की होगी।
सुरक्षा के हैं कड़े इंतजाम
आतंकी हमलों से बचाने के लिए सैन्य बलों ने मास्टर प्लान तैयार किया है। इस बार यात्रा में 17 फीसदी ज्यादा सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। यात्रा की सुरक्षा की जिम्मेदारी इस बार सुरक्षा बलों की 238 कंपनियों को सौंपी गई है। इन कंपनियों के करीब 40,000 जवान यात्रा की सुरक्षा में मुस्तैद रहेंगे। खुफिया विभाग के अधिकारी भी सादी वर्दी में यात्रा पर नजर बनाए रखेंगे।
इस बार अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के लिए एनएसजी कमांडोज को खासतौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही यात्रा मार्ग में कई स्थानों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की भी मदद ली जा रही है। सेना ने अमरनाथ गुफा तक ऑप्टिकल फाइबर कैबल से मोबाइल कनेक्टिविटी की सुविधा उपलब्ध करायी है। यात्रियों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए डॉप्लर रडार की मदद ली जाएगी।



