भले ही बदलते दौर में खादी ड्रेस पहने डाकिया या पोस्टमैन की घंटी हमारे द्वार पर ना सुनाई देती हो लेकिन आज भी डिजिटल संदेशों वाले समाज में घर पर डाकिया द्वारा पहुंची चिट्ठी की अपनी एक अनोखी जगह है। जब पुराने दौर में हमारे प्रियजन का कोई संदेश डाकिया लाया करता था तब डाक के साथ हमारे चेहरे की मुस्कुराहट भी जुड़ी होती थी। तो आइए संदेशों की दुनिया से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों को जानते हैं जिससे की हम वर्ल्ड पोस्ट डे के मौके पर इससे जुड़े संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सके।
दुनिया में कैसे आई चिट्ठी
प्राचीन ग्रीस और मिस्र में जहां घुड़सवार संदेशों का आदान प्रदान किया करता थे वहीं अन्य साम्राज्यों में कबूतर इस अहम भूमिका को निभाते थे। पत्र भेजने का यह तरीका जब तक चलता रहा जब तक आधिकारिक रूप से डाक व्यवस्था समाज में नहीं आई।
ब्रिटेन के शासक हेनरी सप्तम द्वारा स्थापित रॉयल मेल जनता को 31 जुलाई 1635 में सौंपा गया। तब लोग चिट्ठियों की पिलर बॉक्स में डाला करते थे। फिर 1842 में पोलैंड द्वारा सार्वजनिक पोस्ट बॉक्स की शुरुआत की गई। तब इन डिब्बों में खत आराम फ़रमाया करते थे।
1 मई 1840 में दुनिया का सब से पहले डाक-टिकट का ज़िक्र हुआ। रोलैंड हिल द्वारा इजाद किए गए उस टिकट की कीमत मात्र एक पेन्नी थी। पोस्टेज की तय की गई यह कीमत हर उस व्यक्ति को चुकानी होती थी जिसे चिट्ठी भेजना होता था।
आज कई तरह के डाक टिकट उपलब्ध हैं। कई लोग इन डाक टिकटों को कलेक्ट करने का शौक भी रखते हैं। जिसे हम फिलैटली कहते हैं।
टेलीग्राम सेवा ने कैसे किया अलविदा
फर्स्ट वर्ल्ड वार के समय टेलीग्राम दुनिया में सब से ज़रूरी सहारा है। उस दौरान टेलीग्राम ऑफिसेज में भीड़ इकट्ठा हुई करती थी। संदेशों के आदान प्रदान में इस सेवा से लोगों को काफी आसानी होती थी।
आज के दौर में टेलीग्राम पोस्ट सिस्टम से अलग पाया जाता है। 2006 में टेलीग्राफ सर्विस बंद कर दी थी। वहीं, भारत में इसे 2013 में 14 जुलाई की रात 11:45 बजे भावपूर्ण विदाई दी गई।
जानिए ये खास बातें
1983 में अंटार्कटिका के दक्षिण गंगोत्री में देश के बाहर पहला भारतीय डाकघर स्थापित हुआ था।
आज़ादी के दौरान देश में 23,344 डाक घर थे। इनमें शहरी क्षेत्रों में 19,184 और ग्रामीण इलाकों में 4,160 थे।
फिर 2008 तक पूरे देश में 1,55,035 डाक घर थे। शहरी क्षेत्रों में 1,39,173 और ग्रामीण क्षेत्रों में 15,862 थे।
बात यहीं ख़त्म नहीं होती, वर्ल्ड पोस्ट डे के मौके पर अपनों को संदेश भेजना या पुराने संदेशों को पढ़ना ना भूलें।
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