वैसे तो शीला दीक्षित आज हमारे बीच नहीं रही, लेकिन हम आपको उनके जीवन से जुड़ा एक बहुत ही खास किस्सा बताने जा रहे है। जी हां इस किस्से के मुताबिक अगर शीला दीक्षित भूख लगने के कारण कार से बाहर नहीं आती, तो शायद बम धमाके का शिकार हो जाती। बता दे कि यह तब की बात है जब बम धमाके की चपेट में आने से शीला दीक्षित बच गई थी। दरअसल यह जुलाई 1985 की बात है। जब राजीव गाँधी और संत हरचरण सिंह लोंगोवाल के बीच पंजाब पीस अकॉर्ड हुआ था। गौरतलब है कि इसके बाद हर किसी को यही उम्मीद थी कि अब हालात ठीक हो जायेंगे। मगर अफ़सोस कि ऐसा हो न सका। जी हां अगस्त के महीने में ही लोंगोवाल की हत्या कर दी गई। बता दे कि इसी बीच सितम्बर के महीने में विधानसभा चुनाव होना तय हुआ था।
जब बम धमाके की चपेट,,
अब ये तो सब को मालूम ही है कि शीला दीक्षित चुनाव कैम्पेन के लिए हमेशा कही न कही शिरकत करती ही रहती थी। ऐसे में उनको चुनाव प्रचार के लिए पंजाब भेजा गया। यही चुनाव प्रचार के आखिरी दिन जब रैली खत्म हुई, तब सब लोग कार में बैठ कर वापिस जाने के लिए रवाना हो गए। दरअसल शीला दीक्षित बिहार के एक सांसद की कार में बैठ कर बटाला से अमृतसर के लिए रवाना हो चुकी थी। बता दे कि कार में शीला दीक्षित के साथ एक सुरक्षाकर्मी, एक सांसद और एक ड्राइवर मौजूद था। तब दोपहर के एक बज रहे थे। ऐसे में ड्राइवर ने कार एक होटल के सामने रोक ली और कहा कि फ़िलहाल हम यही खाना खा लेते है, क्यूकि अमृतसर पहुँचने में काफी वक्त लग जाएगा।
सामने आ सकता है “फेस ऐप” का खतरनाक चेहरा- सतर्क रहने की ज़रूरत
बता दे कि ड्राइवर की बात मान कर सब लोग अंदर खाना खाने के लिए चली गई और अंदर जाने के बाद शीला दीक्षित ने सॉफ्ट ड्रिंक की पहली घूंट ली ही थी, कि तभी बाहर से जोर के धमाके की आवाज आई। आपको जान कर हैरानी होगी कि यह धमाका उसी कार में हुआ था, जिसमे शीला दीक्षित बैठी थी। यानि अगर शीला दीक्षित भूख के कारण कार से बाहर नहीं आती, तो शायद वह इस धमाके का शिकार हो सकती थी।
हालांकि दुःख की बात ये है कि तब उस कार के पास दो बच्चे भी मौजूद थे, जो उसी कार में हुए ब्लास्ट के कारण मारे गए। वही जब कार की जांच पड़ताल की गई तब पता चला कि कार में टाइम बम फिट किया हुआ था। बता दे कि शीला दीक्षित एक बार जब बम धमाके की चपेट में आने से बच गई, तब उन्होंने हर कदम पर खुद को सतर्क रखा था। शायद अपनी सतर्कता के कारण ही वह अपनी जिंदगी को भरपूर तरीके से जी पाई।


