अब ग्राहकों को मोबाइल पर बात करना और इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए जेब ढीली करनी पड़ी सकती है। आपको बता दे कि टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ प्लान महंगा करने की तैयारियां में लग गई है। जानकारी के अनुसार कंपनियां 1 अप्रैल से दरों में बढ़ोत्तरी कर सकती है। जहां एक रिपोर्ट में यह जानकारी मिल रही है कि इस साल 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2021-22 में रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए कंपनियां टैरिफ का रेट बढ़ा सकती हैं, लेकिन कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी इसकी अभी किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं है।
इसकी वजह से बढ़ा डाटा का इस्तेमाल
वहीं, अभी हाल ही में देश में आई कोरोना महामारी के कारण अन्य क्षेत्रों पर असर देखने को मिला है, लेकिन टेलीकॉम इंडस्ट्री पर इसका कोई भी असर नहीं हुआ है। वहीं, लॉकडाउन के कारण डाटा यूजेज और टैरिफ में बढ़ोतरी की वजह से इस सेक्टर की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। जहां वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से डाटा का इस्तेमाल बढ़ा गया है।
इसमें आया है सुधार
आपको बता दे कि टेलीकॉम कंपनियों के एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (एआरपीयू) यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व में सुधार आया है। अब कंपनियां टैरिफ बढ़ाकर उसकी भरपाई करना चाहती है। हालांकि, इससे पहले बीते हुए साल में भी कुछ कंपनियों ने दर भी बढ़ायी थी।
इतने लाख करोड़ रूपये का बकाया है एजीआर
वहीं, टेलीकॉम कंपनियों पर कुल एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) का 1.69 लाख करोड़ रुपये बकाया है। जहां अभी तक सिर्फ 15 टेलीकॉम कंपनियों ने 30 हजार 254 करोड़ रुपये की भरपाई ही कर पाई हैं। एयरटेल पर करीब 25,976 करोड़ रुपये, वोडाफोन आइडिया पर 50,399 करोड़ रुपये और टाटा टेलीसर्विसेज पर करीब 16,798 करोड़ रुपये का बकाया अभी बाकी है। वहीं, कंपनियों को बकाया राशि अभी चालू वित्त वर्ष और आगे के सालों में चुकाना है। जहां कंपनियां अब एजीआर का भार ग्राहकों के ऊपर डालने की तैयारी में है।




