फिल्म डम्बो टिम बर्टन का एक प्यारे क्लासिक का काफी उलझा हुआ रीमेक जिसमें भावनात्मक पंच का अभाव है| एक हाथी के बच्चे पर आधारित ये कहानी हाथी के बच्चे पे अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाती और पीछे के एनीमेशन में कही खो सी जाती है|
मूल फिल्म डम्बो की अपील उसकी पवित्रता और सरलता से आयी थी। निर्मित जादू का यह अधूरा सच उसके मुकाबले के भी काबिल नहीं है|
लेखन से मात खाती फिल्म
फिल्म डम्बो का लेखन एवं निर्माण महत्वपूर्ण दृश्यों को ठीक से दिखा नहीं पाता है और अनावश्यक किरदारों एवं विषयों का परिचय करता है। अगर हम क्रूरता नहीं भी करें तो फिल्म डम्बो के लेखन को उबाऊ से बेहतर कुछ बोलना गलत होगा| एक सादगी भरी कहानी थी जो दिल को छू जाती थी| इसे बिना मतलब नए किरदारों से बर्बाद किया गया है|
जो अविष्कार लेखन के वक़्त किये गए हैं वे फिल्म को बेहतर बनाना तो दूर की बात उससे उसका आकर्षण चीन लेते हैं| २०१९ के वातावरण को इसमें उबारने की कोशिश की गयी है और ये सरहानीय है परन्तु ये काफी नहीं है और डूबते हुए कथानक को बचा नहीं पाया है|

पिछली फिल्म डम्बो में इंसानो के चेहरे नहीं दिखाए गए थे और उनकी क्रूरता दर्शायी गयी थी| इसके ठीक विपरीत जानवरों का स्वाभाव दिखाया गया था जो डम्बो की मदद करते हैं| इस बार इस हाथी के बच्चे की मदद इंसान ही करते हैं और स्क्रिप्ट से मानवीय क्रूरता का कोण हैट जाता है| ये कहना की इससे कहानी का कुछ भला नहीं हुआ गलत नहीं होगा|
निदेशन के उतार चढ़ाव
टिम बर्टन एक कमाल के निर्माता हैं परन्तु वो भी अपनी छाप छोड़ने में बुरी तरह नाकामयाब रहे हैं| फिल्म डम्बो देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है की इसका निर्देशन बर्टन ने नहीं बल्कि उनके किसी प्रसंशक ने उनकी शैली की नक़ल करते हुए कर दिया हो| विचित्र चीज़ों और गलतफहमी के लिए बर्टन का प्यार और उनकी समझ अनुपस्थिति है।वह एक दुल्हन जो की लाश है और यहां तक कि हाथों से कैंची के साथ एक आदमी को भी मानवीय तरीको से दिखा सकते हैं| लेकिन एक हाथी के बच्चे जिसके पास भावनाओं की खदान है की कहानी के साथ इंसाफ़ी करने में असमर्थ रहे हैं|

फिल्म के निर्माता फिल्म डम्बो की पुरानी गलतियां सुधरने की कोशिश करते हैं| पिछली फिल्म डम्बो कलंकी काफी अच्छी मानी गयी थी परन्तु वो भी अपने पापों के साथ आती थी| इस बार जातिवाद को दर्शाने वाले दृश्यों को हटा दिया गया है| इंसानो में जो एक गलत भाव होता है प्रकृति पे अपनी मलकियत का उसे भी इस बार फिल्म डम्बो में जगह नहीं दी गयी है| ये एक सरहानीय कदम था|
अभिनय एवं संगीत का योगदान
एक्टिंग और CGI के क्षेत्र में फिल्म दबो की न बुराई की जा सकती है न ही अच्छाई| CGI कई भिन्न फिल्मों से उधार ली हुई मालूम होती है और फिल्म के किरदारों पे हावी हो जाती है|

इस भावनात्मक फिल्म का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग इसका संगीत हो सकता था| संगीत का सही जगह पर आभाव महसूस किया गया है परन्तु जो संगीत है वो वाकई दिल को छूने वाला और तारीफ के लायक है|
फिल्म डम्बो: निष्कर्ष
कुल मिला के फिल्म डम्बो एक बहुत ही अच्छी मूवी को पुनः बनाने की एक नाकामयाब कोशिश है| पुरानी यादों के लिए इसे देखा जा सकता है लेकिन इससे आप ऊब जायेंगे इसकी सम्भावना ज़्यादा है|
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