Google हर मौके पर अपने डूडल के ज़रिये के उस दिन के बारे में जानकारी देता है | आज 4जून को भी गूगल ने अपने डूडले के जरियर जानकारी कुछ खास बता रहा है | आज आपको हम बताएंगे की गूगल किस बारे में बता रहा है| गूगल ने आज का डूडल LGBTQ+ प्राइड को समर्पित किया है बारे में जानकारी दिया है| एनीमेशन के ज़रिये कई स्लाइड में बांया है डूडल | हर स्लाइड में अलग अलग सन को बताया है |
क्या खास है जून महीने में ?
डूडल 1969 से शुरू हुए प्राइड इतिहास में ले जाता है, जब समुदाय ने सामूहिक रूप से अपनी पहचान, अधिकारों और सम्मान के लिए लड़ाई शुरू की थी। जून का महीना दुनियाभर में गौरव के महीने के रूप में मनाया जाता है। जून के महीने को LGBTQ उत्सव के रूप में मनाते हैं। इसी समुदाय को गूगल ने आज अपना डूडल समर्पित किया है। गूगल ने अपने डूडल को LGBTQ+ समुदाय के 50 साल के सफर को दस-दस साल के अंतराल में दिखाया है।
कौन बनाया है ये LGBTQ डूडल?
गूगल का य यह डूडल नैट स्वाइनहार्ट द्वारा बनाया गया है। इसके पीछे का विचार ये बताना था कि आंदोलन पिछले कुछ वर्षों में कैसे विकसित हुआ है।डूडलर नैट स्वाइनहार्ट ने कहा, ‘प्राइड परेड पूरे एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए उत्सव और मुक्ति का प्रतीक है। न्यूयॉर्क शहर में क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर सक्रियता के अपने शुरुआती दिनों से लेकर, आज के विश्वव्यापी समारोहों तक, इसने एक उज्ज्वल और जीवंत समुदाय को सशक्त और आवाज दी है।’
अब आप सोच रहे होंगे की क्या है या LGBTQ तो चलिए आपको बता दे की क्या होता हैं एलजीबीटीक्यू
क्या हैं LGBTQ?
आपको बता दे की एलजीबीटीक्यू समुदाय है जिसमे की प्राइड परेड लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, और क्वीर है| आज का दिन LGBTQ की सामाजिक स्वीकृती, उपलब्धि, कानूनी अधिकारों और गर्व का जश्न मनाने वाला दिन होता है | दुनिया भर में आज के दिन से इस समुदाय के लोग प्राइड परेड का आयोजन करते हैं। LGBTQ+ समुदाय के लोगों को लंबे समय से दुनियाभर में नकारा गया था और इस समुदाय के लोगों को अपनी इच्छा, पसंद और अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी।
इस समुदाय की पहेली लड़ई अमेरिका साल 1950 में शुरू हुई थी। और जब 1960 में ट्रांसजेंडर और LGBTQ+ समुदाय के लोग सड़क पर उतर आये थे तन इससे परेड का नाम दिया गया था |
क्या किया सरकार ने ?
पिछले साल गवर्नमेंट ने ऐतिहासिक फैसला सुनते हुए इसको अपराध की श्रीणी में से हटा दिया है और इस बात की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट ने दी थी | इसके साथ ही कोर्ट ने धारा 377 को स्पष्ट रूप से मनमाना करार दिया। पीठ ने कहा कि एलजीबीटीआईक्यू (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर/ट्रांससेक्सुअल, इंटरसेक्स और क्वीर/क्वेशचनिंग) समुदाय के दो लोगों के बीच निजी रूप से सहमति से सेक्स अब अपराध नहीं है।
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