14 मई से प्रारंभ हुए कान्स फिल्मोत्सव 2019 का 25 मई को “द स्पेशल्स” के प्रदर्शन के साथ समापन हो गया। ग्यारह दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव में विश्व की कई हस्तियों ने शिरकत की।
यदि भारत की बात करें तो भारतीय मनोरंजन जगत के फ़िल्मों से लेकर टेलीविज़न तक के सितारों ने कान्स फिल्मोत्सव में उपस्थिति दर्ज कराई।
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अपने पति व गायक निक जोनास के साथ रेड कारपेट पर दिखाई दीं तो वहीं कंगना रनाउत भी विशेष अंदाज़ में दिखीं। टेलीविज़न अभिनेत्री हिना खान व निर्देशक मधुर भंडारकर तथा अन्य भारतीय हस्तियां कान्स में नज़र आए ।
कान्स फिल्मोत्सव से भारत का रिश्ता लगभग 53 साल पुराना है।1946 में चेतन आनंद की फिल्म “नीचा नगर” से इस सफ़र की शुरूआत हुई।इस फिल्म को ग्रैंड प्राइज़ अवॉर्ड प्राप्त हुआ था और इस फिल्म के प्रदर्शन ने अंतर राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिने कला को विशेष पहचान दिलाई ।
इसके बाद सन 1952 में वी.शांताराम की फिल्म “अमर भूपाली” को कान्स फिल्मोत्सव में ग्रैंड प्राइज़ के लिए नामांकित किया गया था जिसे ग्रैंड प्राइज़ तो नहीँ लेकिन बेस्ट साउंड रेकॉर्डिंग का पुरुस्कर ज़रूर मिला। इसके बाद कई भारतीय फिल्म कान्स फिल्मोत्सव के पर्दे पर दिखे जिनमे बिमल रॉय की “दो बीघा ज़मीन” उल्लेखनीय है। “दो बीघा ज़मीन” भारत की क्लासिक फ़िल्मों में से एक है। 1955 में राज कपूर की “बूट पॉलिश” को नामांकित किया गया।
1956 में सत्यजीत रे की पहली फिल्म “पाथेर पांचाली” को “बेस्ट ह्यूमन डॉक्यूमेंटरी” का अवॉर्ड मिला। इसके बाद कई भारतीय फ़िल्मों का औपचारिक प्रवेश हम कान्स फिल्मोत्सव में देखते हैं जिनमें “पारस पत्थर”, “देवी”,” सुजाता “, “गरम हवा”, ” निशांत”, “एक दिन प्रतिदिन”, ” परदेसी” व “मुझे जीने दो” प्रमुख हैं। भारतीय निर्देशक मृणाल सेन की फिल्म “खंडहर” को 1983 में “जूरी प्राइज़” से नवाजा गया वहीं 1982 में इन्हें जूरी सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह भी भारत के लिए गर्व की बात है की 2013 में अभिनेत्री विद्या बालन व निर्देशिका नंदिता दास को अंतर राष्ट्रीय जूरी सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया। मीरा नायर की “सलाम बॉम्बे” तथा गौतम गोजेस की “अन्तर्जली” को 1988 में अवॉर्ड प्राप्त हुए।

इतने समृद्ध परंपरा के साथ यह भी हमारे लिए गौरव की बात है की 2013 में सत्यजीत रे की फिल्म “चारूलता” को कान्स क्लासिक के रूप में प्रदर्शित किया गया। इसके बाद “मसान” ,”लंच बॉक्स” आदि फ़िल्मों को कान्स फिल्मोत्सव में विशेष सराहना मिली।
और भी अनेक फिल्में हैं जिनका ज़िक्र हम यहाँ नहीँ कर पाए लेकिन हमारा यह विश्वास है की कान्स फिल्मोत्सव व भारतीय फ़िल्मों का ये संबंध निरन्तर बढ़ता ही जाएगा।