बॉलीवुड की रिकॉर्ड तोड़ व ब्लाकबस्टर रोमांटिक फ़िल्म डीडीएलजे, बॉलीवुड फिल्मों के दर्शकों के लिए एक नायाब तोहफ़ा के तरह है। आज भी अगर किसी चैनल पर ये फिल्म आ रही हो तो घरवाले सारे काम छोड़ बस राज और सिमरन की प्रेम कहानी में खो जाते हैं।
बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बातें अक्सर होती हैं, लेकिन इस फिल्म की कुछ ऐसी छोटी छोटी बातें हैं जिसे हम आप आज तक नहीं जानते थे, तो चलिए जानते ऐसे कुछ राज़ जो राज और सिमरन की प्रेम कहानी में छुपे हुए हैं।
शाहरुख के जगह इन्हें चुना जा रहा था
इस फिल्म के डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा, फिल्म में टॉम क्रूज को हीरो कास्ट करना चाहते थे। फिल्म का पहला टाइटल भी ‘द ब्रेवहर्ट विल टेक द ब्राइड’ था। ज़ाहिर है कि, अगर टॉम क्रूज ये फिल्म करते तो ना तो शाहरुख जैसे फनी फेस बनाते और ना ही पीली सरसों के खेत में नाचते। फिर यश चोपड़ा ने आदित्य को यह बात समझाई और बात शाहरुख पर जाकर अटकी।
वहीं, आदित्य चोपड़ा को शाहरुख के साथ 4 मीटिंग करनी पड़ी, तब जाकर उन्होंने रोल स्वीकार किया। अगर शाहरुख खान नहीं मानते तो आदित्य की अगली पसंद सैफ अली खान थे।
इन्होंने दिया टाइटल
किरण खेर ने इस फिल्म को टाइटल ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ दिया।
ख़ास बातें
आदित्य चोपड़ा बतौर डायरेक्टर अपनी पहली फिल्म ऐसे बनाना चाहते थे जिसमें 3 जोड़ियों की प्रेम कहानी और एक म्यूजिक टीचर हो। पर उनकी पहली फिल्म डीडीएलजे बनी। उनका सपना 2000 में फिल्म ‘मोहब्बतें’ द्वारा पूरा हुआ।
बॉलीवुड फ़िल्म डीडीएलजे में पहनी गई शाहरुख खान की फेमस लेदर जैकेट उदय चोपड़ा ने कैलिफोर्निया के बेकर्सफील्ड में हार्ले-डेविडसन के शोरूम से 400 डॉलर में खरीदी थी। सिमरन की भूमिका निभा रहीं काजोल के मंगेतर (कुलजीत) के रोल के लिए भी पहले अरमान कोहली से बात की गई थी। लेकिन क्योंकि ऑडिशन पर परमीत सेठी बूट्स, जीन्स और वेस्टकोर्ट पहन कर आए, तो स्क्रीन टेस्ट में पास हो गए।
मेंहदी लगा के रखना गाने का राज़
मेंहदी लगा के रखना’ गाने में काजोल के लिए मनीष मल्होत्रा ने हरे रंग का सूट डिजाइन किया। लेकिन डायरेक्टर को यह बात खटकी कि, पंजाबी परिवारों में लड़कियां लाल, मरून या गुलाबी कपड़े पहनती हैं।
इस फिल्म में डायरेक्टर ने शाहरुख का नाम ‘राज’ रखा जो कि शोमैन राज कपूर से प्रेरित था। फिल्म में उनका पूरा नाम राजनाथ था, जो कि 1973 की फिल्म ‘बॉबी’ में ऋषि कपूर के नाम से प्रेरित था।
फिल्म के एक सीन में अनुपम खेर शाहरुख को अपने दादा परदादा की पढ़ाई में नाकामयाबी के किस्से सुनाते हैं। दरअसल वो अनुपम खेर के सगे संबंधी के नाम हैं जो कि वाकई पढ़ाई में कुछ खास अच्छे नहीं थे।
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