ये दुनिया बेहद खूबसूरत है, इसका हर पहलू कुछ न कुछ अलग दास्तान बयां करता है. यहाँ देखने के लिए बहुत कुछ है. पर जो लोग देख नहीं सकते उनका क्या? दरअसल जो लोग देख नहीं सकते, वो चीजों को छू कर महसूस करते हैं. किस चीज़ का आकार और प्रकृति किस तरह का है, ये सारी चीज़ें वो छू कर ही एहसास करते हैं.
पर कला की दुनिया एक ऐसी जगह है, जहाँ पेंटिंग्स को छू कर महसूस नहीं किया जा सकता था. क्योंकि पेंटिंग्स हमेशा एक ही विमा (dimension) में बनाई जाती हैं. विश्व की मशहूर कलाकृतियाँ हमेशा संग्रहालय की दीवारों पर सहेज कर लगायी जाती हैं. और साथ ही उन पर शीशे का एक कवर भी लगाया जाता है, जो की उन्हें महफूज़ रखने में मदद करता है. पर जो लोग देख नहीं सकते, उनके लिए ये कभी संभव नहीं था, कि वो इन कलाकृतियों को छू कर महसूस कर सकते. संग्रहालयों में नेत्रहीनों के लिए ना ही कोई ब्रेल लिपि होती है ना ही कोई जानकारी से सम्बन्धित ऑडियो.
कलाप्रेमी नेत्रहीनों के लिए एक खूबसूरत पहल
एक विदेशी कम्पनी ने विश्व प्रसिद्ध कलाकृतियों का कुछ इस तरह पुनर्निमाण कराया है, कि जो लोग देखने में असमर्थ हैं वो छू कर कलाकृतियों को महसूस कर सकते हैं और और इन आर्ट पीसेस का लुत्फ़ उठा सकते हैं.
इन कलाकृतियों में लिओनार्दो दि विन्ची की सबसे प्रसिद्ध आर्ट वर्क मोनालिसा भी शामिल है. मोनालिसा की पेंटिंग इतिहास की उन प्रसिद्ध कलाकृतियों में से एक है जिसे करीब 60 लाख लोग साल में देखने आते हैं. पर जो लोग इसे नहीं देख सकते उनके लिए ‘थ्री डी फोटोवर्क्स’ नाम की एक कम्पनी ने इसकी ऐसी कलाकृति बनाई हैं जिसे लोग महसूस कर सकते हैं.
तो थ्री डी फोटोवर्क्स’ के द्वारा की गयी इस पहल ने दृष्टिहीनों को कला को महसूस करने और उसे सराहने का मौका दिया.