आज से कुछ वर्ष पहले एक समय था जब लोग सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारी का नाम भी नहीं सुने थें। लेकिन बदलते समय और जीवनशैली से अब ये बीमारी सामान्य हो गयी है। पिछले कुछ वर्षो में ये समस्या बुजुर्गो के साथ-साथ युवाओं में भी 60 फीसदी तक बढ़ गयी है। इतना ही नहीं, बल्कि अब तो कई बार सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या किशोरों और बच्चों में भी देखने को मिल जाती है जो बड़ी हैरान करने वाली बात हैं। तो आइये जानते हैं कि कैसे इससे बचा जा सकें।
विशेषज्ञों की राय
अस्थि रोग विशेषज्ञों की मानें तो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस एक दैनिक दिनचर्या से जुड़ी बीमारी हैं। ये समस्या अधिकतर स्पाइन के सबसे ऊपरी भाग सर्वाइकल स्पाइन में होती है। इसी कारण इसे सर्वाइकल स्पॉन्डोलाइटिस कहते हैं। आज के युग में युवा पीढ़ी मोबाइल और लैपटॉप में घंटों लगे रहते हैं, गलत तरीके से बैठते है, गलत तरीके से सोना, व्यायाम न करने की आदत और तनाव आदि इसके प्रमुख कारण हैं।
ऐसे करें पहचान इस बीमारी की
इस बीमारी की शुरुआती लक्षण गर्दन से नीचे कड़ापन का होना व दर्द से होता है और धीरे-धीरे ये दर्द और अकड़न कंधों, रीढ़ की हड्डी से होते हुए हाथों तक पहुंच जाता हैं। कई बार इससे पीड़ित व्यक्ति को सिर में दर्द और चक्कर की समस्या भी होती है। इस तरह की समस्या होने पर बीमारी को गंभीरता से लें और विशेषज्ञ से परामर्श लें नहीं तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। जिसके भयंकर दुष्परिणाम हो सकतें हैं।
ये है उपचार
यूं तो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का कोई सटीक उपचार अभी तक नहीं है, क्योंकि ये दैनिक दिनचर्या से जुड़ी बीमारी हैं। इसलिए अपनी जीवनशैली में थोड़ा सा परिवर्तन करके और कुछ योगासन आदि की मदद से इसे काफी नियंत्रित किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त अस्थि रोग विशेषज्ञ कई बार गर्दन पर कॉलर लगाने की भी सलाह देते हैं। विशेषज्ञों द्वारा बताई गई दवाइयां समय से लें और उनके निर्देशों का पालन करें। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की होमियोंपैथिक में काफी अच्छी दवाइयां आती हैं।
बचाव के उपाय
- लगातार अधिक समय तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम न करें, बीच-बीच में गर्दन को घुमाएँ तथा झुककर कोई भी काम न करें।
- बहुत नरम बिस्तर पर न सोएं इससे समस्या और अधिक बढ़ सकती हैं।
- नियमित रूप से प्रति-दिन व्यायाम करें।
- जरूरत से अधिक वजन न उठाएं।
- पानी अधिक मात्रा में पिएं तथा डाइट में कैल्शियम युक्त आहार शामिल करें।



