अफ़्रीका के हंटिंग डॉग इस तकनीक का इस्तेमाल कर शिकार करने में होते हैं सफल

अफ़्रीका के हंटिंग डॉग

ऐसे तो हम अक्सर टीवी पर शेर, चीता, भालू जैसे कई अन्य जंगली जानवरों को शिकार करते हुए देखते हैं लेकिन अपको बता दें कि ऐसे और भी कई जंगली जानवर हैं जो चौंका देने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर शिकार करते हैं। इनमें अफ़्रीका के हंटिंग डॉग का नाम सब से ऊपर है। कहा जाता है कि ये अपने शिकार का तब तक पीछा करते हैं जब तक कि वो थक कर हार ना मान जाए, इस तरह अफ़्रीका के हंटिंग डॉग शिकार करने में सफल हो जाते हैं।

दरअसल इनकी ताकत, तेज़ गति या फिर छिपने की काबिलियत इनके कामयाब शिकारी नहीं बनाती बल्कि इनके शिकार करने की तकनीक ही कुछ अलग होती है। आइए हम इनकी उन्हीं तकनीकों को जान लेते हैं।

इनकी तादाद लुप्त होने की कगार पर है

अफ्रीकी जंगली कुत्ते शेर और लकड़बग्घों से अलग दिखने वाले ये हंटिंग डॉग आज अफ़्रीका में लुप्त होने की कगार पर हैं। इन्हें
पेंटेड डॉग या हंटिंग डॉग भी कहा जाता है। बता दें कि, विकास प्रक्रिया के दौरान इन कुत्तों के अगले पैरों की हड्डियों, मांसपेशियों और जोड़ों में एक खास तरह का बैलेंस होता है, जिसके वजह से ये तेज दौड़ते हुए भी अपना बैलेंस बरक़रार रखते हैं।

20-30 के समूह में जंगली कुत्ते पूर्वी अफ़्रीका में हिरणों का शिकार करने के लिए उनके पीछे दौड़ लगाते हैं। इस दौरान करीब 50 किलोमीटर तक ये हर रोज़ दौड़ लगाते हैं। शिकार को थका देने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर ये उनको आसानी से झपट लेते हैं। इस दौरान इनकी रफ्तार 64 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहती है।

चार उंगलियों वाले इन डॉग्स के बारे में जानें और भी बहुत कुछ
अपको बता दें कि कुत्ते, भेड़िए, लोमड़ी इस तरह के जानवरों के समूह को कैनिड कहा जाता है। और कैनीड जीवों में सिर्फ हंटिंग डॉग ही ऐसे कुत्ते हैं जिनके पैरों में सिर्फ चार उंगलियां होती हैं। इस कारण इनकी गति तेज़ होने के साथ साथ इनकी छलांगें भी काफी लंबी लगती हैं।

जानिए ये ख़ास बातें

रिसर्चर्स द्वारा हुए जब चिड़िया घर में प्राकृतिक कारणों से मेरे एक अफ़्रीकी हंटिंग डॉग का सिटी स्कैन किया गया तो पता लगा कि पंजों की त्वचा के नीचे एक छोटी सी ऊंगली भी मौजूद होती है। इस उंगली से कुत्ते की दौड़ने के दौरान उनकी स्थिति, स्थान, दिशा, शरीर और शरीर के अंगों का बैलेंस बनाएं रखने में सहायता मिलती है।

रिसर्चर्स का मनना है कि उनके पैरों की मांसपेशियों में ऐसी हल्की ऐंठन होती है जो उन्हें बेहोश होने से बचाती हैं। कहा जाता है इनमें अन्य जंगली जानवरों की तुलना में ज्यादा स्टैमिना होता है।

 

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Saddiya Anwar

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