8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाता है। विश्व में शिक्षा के महत्व को उजागर और निरक्षरता को ख़त्म करना इस दिन का उद्देश्य है। इस कारण हर साल 8 सितंबर को अपने मुख्य उद्देश्य, ‘समाज में लोगों के प्रति शिक्षा को प्राथमिकता देने को बढ़ावा देने’ के साथ मनाया जाता है।
इस दिवस पर लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं। इस दिन शिक्षा और मानव जीवन में इसकी भूमिका को दर्शाया जाता है। साथ ही कैसे एक व्यक्ति, समुदाय और समाज को शिक्षा लाभान्वित करता है इस बात की जागरूकता पूरे संसार में साझा करने का प्रयास किया जाता है।
पहला विश्व साक्षरता दिवस कब मनाया गया था, जानिए
8 सितंबर 1966 को पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया था। सयुंक्त राष्ट्र साक्षरता दशक साल 2009-2010 में घोषित हुआ था। तब से आज तक इस दिन को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पेरिस स्थित यूनेस्को द्वारा अपने मुख्यालय में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
साल 1956 में 8 से 19 सितंबर को निरक्षरता को समाप्त करने के उद्देश्य से ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मानने का विचार पहली दफा ईरान के तेहरान में शिक्षा के मंत्रियों के विश्व सम्मेलन में किया गया था। फिर 1965 में यूनेस्को द्वारा विश्व साक्षरता दिवस की घोषणा की गई।
विश्व साक्षरता दिवस 2020 के थीम और विवरण पर एक नज़र
इस मौके पर वैश्विक समरोह में दो वर्चुअल बैठकों का आयोजन किया गया। पहली बैठक : बैठक साक्षरता शिक्षण और कोविड-19 संकट में व उससे परे सीखने विषय पर शिक्षकों की भूमिका और बदलती शिक्षाओं को लेकर हुई। दूसरी बैठक : यूनेस्को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता पुरस्कार 2020 संबंधित हुई।
इस दिन अधिकतर लोग गरीब बच्चों को पढ़ाने का ज़िम्मा लेते हैं। लोगों के बीच शिक्षा संबंधित महफिलें जमती हैं। जगह जगह शिक्षा को लेकर भाषण दिए जाते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हो सकें।
संक्युक्त राष्ट्र के आंकड़ें के मुताबिक दुनियाभर में तकरीबन चार अरब लोग साक्षर हैं। आंकड़ों को माने तो हर 5 वयस्क लोगों में से एक अब भी निरक्षर है। और भारत की बात की जाए तो यहां के साक्षरता दर विश्व की साक्षरता दर की तुलना में बहुत कम है। हकाकिं, देश में सर्व शिक्षा अभियान और साक्षर भारत के लिए कई अनूठे कदम उठाए जा रहे हैं। साक्षरता का मतलब सिर्फ पढ़ने और लिखने या शिक्षित होने तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें लोगों के अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूकता भी शामिल है। साथ ही इन विकल्पों और सामाजिक विकास के बीच संबंध को उजागर करना भी उद्देश्य है।
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