नौ नवंबर एक ऐतिहासिक दिन है। इस दिन कई घटनाएं रची गई हैं। ऐतिहासिक नज़रिए से यह दिन तो ख़ास है ही बल्कि इसी दिन भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सालों पुराने अयोध्या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। एक और ऐतिहासिक तथ्य जो सालों पहले नौ नवंबर को ही रचा गया था, जिसे आप जानकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे।
जानिए कैसे पूर्वी और पश्चिम जर्मनी एक हुए
आज से तीस साल पहले नौ नवंबर 1989 को बर्लिन की दीवार को गिरा दिया गया था। यह ऐतिहासिक घटना इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है। जिन लोगोंं ने इस दीवार को बनते और गिरते देखा उनके लिए वह पल बेहद खास रहा होगा। ख़ास बात यह है कि, इसके गिरते ही पूर्वी और पश्चिम जर्मनी एक हो गए थे।
दीवार बनाने के पीछे उद्देश्य
13 अगस्त 1961 को बर्लिन की दीवार का निर्माण हुआ था। इसको बनाने के पीछे दो बड़े लक्ष्य थे। पहला कई देशों द्वारा पश्चिमी जर्मनी से पूर्वी जर्मनी की हो रही जासूसी को बंद करना वहीं, दूसरा मकसद उस वक्त हो रहे पलायन पर रोक लगाना था।
लाइट बंद कर के दिया, इस ऐतिहासिक काम को अंजाम
बता दें कि, लोगों के पूर्वी जर्मनी से पश्चिम की ओर पलायन करने का असर यहां के उद्योग धंधों पर पड़ रहा था। इस पर रोक लगाने हेतु सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने दीवार का निर्माण करवाया। यह शीतयुद्ध का दौर था। इस दौर में यहां पर करीब 60 जासूसी सेंटर मौजूद थे। दीवार बनाने से पहले पूर्वी जर्मनी ने सीमा को रातों-रात बंद कर यहां पर भारी मात्रा में सुरक्षाबल तैनात कर दिए। सड़कों की लाइट बंद कर रातों-रात यहां पर कटीले तारों की बाड़ लगा दी गई।
ऐसे बंट गया देश
दीवार बन जाने के बाद एक दूसरे के इलाके में कदम रखने के लिए नियम बेहद सख्त कर दिए गए। इसको पार करने के लिए वीजा जरूरी हो गया था। दोनों तरफ के लोगों के लिए यह फैसला काफी बुरा था। इस निर्णय से कई परिवार बिछड़ गए थे। इसकी निगरानी के लिए 300 से भी अधिक वॉच टावर बनाए गए थे। इन पर चढ़कर गार्ड यहां से गुजरने वालों पर कड़ी निगाह रखते थे।
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अवैध रूप से गुजरने वालों को यहां बिना पूछे गोली मार दी जाती थी। अब इनमें से कुछ ही बचे हैं। इसमें से एक है पॉट्सडामर प्लात्स के पास खड़ा एक टावर।
लोगों के गुस्से को देखते लिया गया एक और बड़ा फ़ैसला
समय बीतने के साथ लोगों के अंदर इस दीवार को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा था। लोगों के इस गुस्से को मद्देनजर रखते हुए नौ नवंबर 1989 को पोलित ब्यूरो के सदस्य गुंटर शाबोस्की ने इस दीवार को खोलने की घोषणा की। इस ऐलान की खबर आग की तरह फैली और लोग अपने परिजनों से मिलने के लिए काफी संख्या में दीवार के नजदीक एकत्रित हो गए। दीवार के हटने के बाद कई परिवार और लोग ऐसे थे जो वर्षों बाद अपनों से मिले थे। उनके लिए यह अहसास कभी न भूलने वाला था।
बर्लिन की दीवार के बारे में जानिए ख़ास बातें
यह दीवार करीब 160 किलोमीटर लंबी थी। वर्तमान में यहां पर दीवार के अवशेषों को इतिहास की धरोहर के तौर पर एक म्यूजियम में रखा गया है। जब तक यह दीवार थी तब यहां पर चेकपॉइंट चार्ली जो एक क्रॉसिंग प्वाइंट था वह काफी प्रसिद्ध था। बता दें कि, पश्चिम जर्मनी जहां पर अमेरिका के हाथों में था वहीं पूर्वी में रूस हावी था। दोनों ही देश एक दूसरे की जासूसी करवाते थे। इस चेकप्वाइंट पर अमेरिकी सैनिक हाथों में तख्ती लिए खड़े रहते थे, जिसपर लिखा होता था आप अमेरिकी सेक्टर में हैं। इस जगह को कोल्ड वार डिज्नीलैंड भी कहा जाता है। तो इस तरह नौ नवंबर एक ऐतिहसिक दिन बन कर रह गया। अन्य कई बड़े बड़े फैसले इस दिन लिए गए।
