हितेश पंत (नई दिल्ली)
जिमनास्टिक्स में भारत को एक नई पहचान मिल गई है। जिमनास्टिक्स वर्ल्ड कप में व्यक्तिगत तौर पर पदक जीतकर अरुणा रेड्डी ने इतिहास रच दिया। ऐसा करने वाली अरुणा देश की पहली जिम्नास्ट हैं। इससे पहले दीपा कर्माकर जिम्नास्टिक्स में देश का नाम ऊंचा कर चुकीं हैं।
हैदराबाद की रहने वाली अरुणा रेड्डी ने जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड कप में कांस्य पदक अपने नाम किया है। अभी तक कोई भी भारतीय जिमनास्ट ये कारनामा नहीं कर पाया है। 22 साल की अरुणा 2002 से जिम्नास्ट के गुर सीख रहीं हैं। अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अरुणा ने 2005 में अपना पहला नेशनल मेडल जीता।
जिमनास्ट से पहले अरूणा कराटे में निपुण थी। कराटे में उन्हें ब्लैक बेल्ट की उपाधि मिली है। पिता के साथ अरूणा कराटे का प्रशिक्षण लेने जाती थी। पिता बेटी की प्रतिभा जानते हुए 2002 में अरुणा को जिम्नास्ट में ले आए। लेकिन 2010 में पिता की मृत्यु के बाद अरुणा को कई परेशानियों से भी रूबरू होना पड़ा। लेकिन पिता की मौत के बाद भी अरुणा इस क्षेत्र में लगातार शानदार प्रदर्शन करती रहीं हैं।
अरुणा रेड्डी और दीपा कर्माकर साल 2011 एक साथ ट्रेनिंग ले रही हैं। अरुणा कई चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुकी है। इस पदक के बाद अरुणा अब अप्रैल में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगी।
