हितेश पंत (नई दिल्ली)
भारतीय रेलवे आम जिंदगी की रीढ़ है। हर दिन लाखों यात्री रेल से अपना सफर पूरा करते हैं। ब्रिटिश शासन में रेलवे की शुरुवात के बाद से अब तक देशभर में रेल नेटवर्क का जाल बिछ चुका है। नौकरी देने और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में रेलवे देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। आज भारतीय रेलवे का सबसे ऐतिहासिक दिन है। आज ही के दिन देश की पहली पैसेंजर ट्रेन की शुरुआत हुई थी।
देश की पहली पैसेंजर ट्रेन को 16 अप्रैल 1853 के दिन हरी झंडी देकर रवाना किया गया था। हांलाकि देश में रेलवे की शुरुआत 22 दिसंबर 1851 को ही हो गई थी, जब पहली मालगाड़ी पटरी पर उतरी थी। पहली पैसेंजर ट्रेन मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल (बोरीबंदर) से ठाणे के बीच चली थी। इन स्टेशनों के बीच ट्रेन ने करीब 34 किमी का सफर तय किया।
पहली पैसेंजर ट्रेन को दिन में 3.30 मिनट पर बोरीबंदर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और शाम 4.45 में ये ट्रेन ठाणे पहुंची। 20 कोच वाली इस पहली ट्रेन में 400 यात्रियों ने सफर किया था। इस ट्रेन को ब्रिटेन से मंगाए गए 3 इंजनों से खींचा गया। इसके बाद से देश में ही इंजन बनने का काम शुरू हो गया।
इसके बाद देश में रेलवे का विस्तार ने रफ्तार पकड़ ली। हर राज्य में रेलवे का जाल बिछने लगा। 1 जनवरी 1856 को मद्रास रेलवे कंपनी की स्थापना के साथ दक्षिण भारत में रेलवे का विस्तार शुरु हुआ। आजादी के समय रेलवे ने करीब 50 हजार किमी क्षेत्र में अपना नेटवर्क बना लिया।
आजादी के बाद रेलवे के विस्तार का दायरा सीमित होने लगा। इसका ही परिणाम है कि वर्तमान में रेलवे का कुल नेटवर्क करीब 63 हजार किमी है। लेकिन इस बीच देश में रेलवे की सुविधाएं बढ़ाने का काम काफी तेजी से हुआ। 1951 को भारत सरकार ने रेलवे का राष्ट्रीकरण किया। आज टेक्नोलॉजी के लिहाज से भी भारतीय रेलवे काफी आगे बढ़ है।