भूमिका : हम सब जानते हैं कि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है। आज भारत में दूसरे देशों से सबसे ज्यादा युवा बसते हैं। युवा वर्ग वह वर्ग होता है जिसमें 14 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग शामिल होते हैं।
आज भारत देश में इस आयु के लोग सबसे बड़ी संख्या में मौजूद है। यह एक ऐसा वर्ग है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर है। जो देश और अपने परिवार के विकास के लिए हर संभव प्रयत्न करते हैं। आज भारत देश में 75% युवा पढ़ना लिखना जानता है।
आज भारत ने अन्य देशों की तुलना में अच्छी खासी प्रगति की है। इसमें सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का है। आज भारत का हर युवा अच्छी से अच्छी शिक्षा पा रहा है. उन्हें पर्याप्त रोजगार के अवसर मिल रहे हैं परंतु दुख की बात यह है कि आज का युवा भले ही कितना ही पढ़ लिख गया हो परंतु अपने संस्कार व देश और परिवार के प्रति जिम्मेदारियों को दिन-प्रतिदिन भूलता ही जा रहा है।
आज भारत का युवा वर्ग ऊंचाईयों को छूना चाहता है परंतु वह यह भूलता जा रहा है कि उन ऊंचाईयों को छूने के लिए वह स्वयं अपनी जड़ें खुद काट रहा है।
भारत का युवा वर्ग तैयार है एक नई युवा क्रांति के लिए। लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ इस युवा वर्ग को रोक रही हैं। भारत का युवा वर्ग भारत में अपना योगदान देने की बजाय विदेशों में जाकर बस जाता है।
आजकल राजनीति सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गयी है । एक श्रमिक से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग तक सभी राजनीति से संबंधित चर्चा करते रहते हैं । युवा वर्ग देखता है कि केवल पढ़ाई जीवन में काम नहीं आती है । छात्र चाहे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर ले परंतु जब तक वह अन्य उपाय नहीं करेगा तब तक सुख-सुविधा एवं मान-प्रतिष्ठा का जीवन व्यतीत नहीं कर सकेगा ।
यही कारण है कि छात्र जीवन में राजनीति प्रवेश कर गयी है । कुछ लोगों का कहना है कि 1921 के असहयोग आदोलन में अपनी पढ़ाई छोड़कर छात्रों का आना दूरगामी परिणामों की दृष्टि से न छात्रों के हित में हुआ है और न देश के हित में रहा है ।
युवा वर्ग में व्याप्त अनुशासनहीनता उसी आदोलन का परिणाम है । युवाओं में शक्ति होती है उत्साह होता है निर्भीकता होती है और आगा-पीछा सोचे बिना आग-पानी में कूद पड़ने की तमन्ना होती है । अनुभव के अभाव में वे प्राय: साहसिक कार्य कर बैठते हैं और हानि उठाते हैं । युवाओं का अहित एक अन्य प्रकार से भी होता है । राजनीति के चतुर खिलाड़ी युवा वर्ग के अल्हड़पन एवं उत्साह का अनुचित लाभ उठाते है ।
वे अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए भड़कीले भाषण करके युवकों को भड़का देते हैं और उन्हें अपना मोहरा बना लेते हैं । हम स्वयं देखते हैं कि प्रत्येक आदोलन में जेल जाने वालों में तथा लाठी-गोली खाने वालों में युवकों की संख्या ही सर्वाधिक होती है । इस प्रकार राजनीति में सक्रिय भाग लेने पर युवकों का शोषण भी अधिक होता है ।
कुछ लोग राजनीति को वेश्या की संज्ञा देते हैं और कहते हैं कि इस दलदल में फँसकर युवकों का जीवन नष्ट हो जाता है । हो सकता है कि राजनीति के क्षेत्र में सरल स्वभाव वालों के लिए धोखा ही धोखा और खटका ही खटका हो परंतु यह भी सत्य है कि राजनीति के सोपान पर चढ़कर ही व्यक्ति लौकिक सफलता के शिखर पर पहुँच पाता है हमारे समस्त माननीय श्रीमान लोग तो राजनीति की ही देन हैं ।
कुछ लोगों का कहना है कि राजनीति तो गुंडों का क्षेत्र है युवक उससे दूर रहें । परंतु क्या यह संभव है कि जागरूक और उत्साही व्यक्ति राजनीति से दूर रह सकें ? राजनीति हमारे जीवन के प्रत्येक अंग में समा चुकी है वह सर्वव्यापी बन गयी है । हम उसको भले ही छोड़ना चाहें, परंतु वह हमें नहीं छोड़ेगी ।
हमारे छात्र अथवा युवक राजनीति से असंयुक्त तो नहीं रह सकते हैं । यह हो सकता है कि उन्हें राजनीति के प्रति रुचि हो उसके प्रति उत्साह हो परंतु कुछ विशिष्ट अवसरों पर ही वे राजनीति में सक्रिय भाग लें परंतु क्या यह संभव है ? युवकोचित उत्साह क्या उन्हें रुकने देगा ? स्वार्थी राजनीतिज्ञ क्या उन पर दया करके उन्हें अपना काम करने देंगे ? युवकों के अभाव में वे किसके कंधों पर रखकर बंदूक चलायेंगे ?
युवकों का समूह उन्हें विद्यालयों में ही मिल सकेगा और फिर जब हमारा युवक यह देखेगा कि राजनीति की रज धारण करने वाले के लिए ही ‘सिम-सिम’ का द्वार खुलता है, तब फिर वह दर-दर की धूल फाँककर पेट भरने का रास्ता क्यों अपनायेगा ?
भारत को स्वतंत्र हुए 56 वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो चुका है परंतु हमारे अधिकांश निर्माण कार्य अधूरे अथवा निष्क्रिय पड़े हुए हैं । उल्टे हमारे देश में भ्रष्टाचार, तस्करी, रिश्वतखोरी, काला बाजारी, बेकारी आदि का बोलबाला है ।
इन सबका मूल कारण यह है कि हमारी जितनी भी विकास योजनाएँ हैं वे सब धन सापेक्ष हैं जन सापेक्ष नहीं हैं । दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि विकास कार्य एक विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों के हाथों में सौंप दिये गये हैं और जनशक्ति की उपेक्षा की गयी है ।
यदि हमारे युवकों को काम दिया जाये तो वे पूरे उत्साह के साथ इन्हें पूरा कर डालें और हमारे समाज में व्याप्त उक्त बुराईयाँ सहज ही समाप्त हो जाये युवकों ने कई स्थानों पर ग्राम विकास प्रौढ़-शिक्षा समाज-सुधार दहेज-विरोध आदि कार्यों को सफलतापूर्वक संपादित करके यह प्रमाणित कर दिया है कि हमारा युवा वर्ग देश के नव-निर्माण के लिए पूर्णत: समर्थ एवं सक्षम है ।
जो लोग युवकों के केवल विद्रोही रूप को देखने के अभ्यस्त हैं उनसे हमारा निवेदन है कि वे यह भी जानने का प्रयत्न करें कि इस विद्रोही रूप के पीछे सत्य निष्ठा और न्याय की त्रिवेणी बहती है । युवा वर्ग हमारा उत्तराधिकारी है । आज नहीं तो कल वह समाज का कर्णधार बनेगा । भविष्य उसी के कंधों पर सुरक्षित है ।
पुरानी पीढ़ी का दायित्व है कि वह युवा पीढ़ी का सम्यक् मार्गदर्शन करे । पुरानी पीढ़ी उनके मार्ग का रोड़ा न बने । वे स्वयं अपने साधनों से अपना मार्ग प्रशस्त कर लेंगे । युवा छात्र सक्रिय राजनीति में रुचि लें इसमें कोई हानि नहीं है । हानि की संभावना तब होती है जब राजनीति का व्यवसाय करने वाले नेता उनके अल्हड़पन को अपनी स्वार्थ सिद्धि का साधन बनाता है ।
अपने कल्याण एवं देश की प्रगति की दिशा में युवा वर्ग का पहला शुभ कदम यह-होना चाहिए कि वे राजनीतिक नेताओं के भड़कावे में फँसकर कोई काम न करने का संकल्प करें । वे यदि स्वविवेक से काम करने का अभ्यास करेंगे तो हमें विश्वास है कि वे कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे समाज और देश का अहित होगा । युवा वर्ग विवेक द्वारा संतुलित चिंतन करके सक्रिय राजनीति में भाग लें देश और भविष्य उसके हाथ में सुरक्षित हैं ।


