ओआईसी की बैठक में, सुषमा स्वराज ने आतंक का खंडन करने के लिए कुरान और वेद का हवाला दिया।

सुषमा स्वराज

सुषमा स्वराज कल रात OIC सम्मेलन को सम्बोधित करने के लिए अबू धाबी पहुंचीं, और वहां उन्होंने वैश्विक आतंकवाद से निपटने के लिए इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) से “एक साथ” काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कड़े व ऊँचे स्वर में कहा “यदि हम मानवता को बचाना चाहते हैं, तो हमें उन राज्यों को सबक देना चाहिए जो आतंकवादियों को आश्रय और धन मुहैया कराते हैं, आतंकवादी शिविरों के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने और उस देश में स्थित आतंकवादी संगठनों को धन आश्रय और धन मुहैया कराने से रोकना चाहिए,” विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा अपनी राज्य नीति के एक साधन के रूप में आतंकवाद का उपयोग करते हैं ये देश।

आतंकवाद पर कड़े स्वर में बोली विदेश मंत्री :

हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहां आतंक की पहुंच बढ़ती ही जा रही है, हम उस संवेदनहीन हिंसा को देख के नज़रअंदाज़ कर रहे हैं जिसका परिणाम आतंकवाद हो सकता है। हमें वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए।

आतंकवाद और उग्रवाद अलग-अलग नाम और लेवल रखते हैं।ये दोनों एक दूसरे से भट अलग चीज़ है लेकिन प्रत्येक मामले में, यह धर्म की विकृति, और सफल होने की अपनी शक्ति में एक गलत धारणा से प्रेरित करते है।आतंकवाद के खिलाफ आवाज़ उठाना किसी भी धर्म के खिलाफ कोई टकराव नहीं है।
जिस तरह इस्लाम का शाब्दिक अर्थ है शांति, अल्लाह के 99 नामों में से कोई भीनाम का मतलब हिंसा नहीं है। इसी तरह, दुनिया का हर धर्म शांति, करुणा और भाईचारे ही चाहता है।

भारत ने हमेशा से सही को गले लगाना सीखा है, और इसे आसान भी पाया है क्योंकि यह सबसे पुराने संस्कृत धार्मिक पाठ “द ऋग्वेद” में सन्निहित है और मैं “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति” का उदहारण देती हूं, जिसका अर्थ है “भगवान एक है” , बस इंसान ही उनको अलग अलग नाम से बुलाते हैं।
यह आतंकवाद सभ्यताओं या संस्कृतियों का टकराव नहीं है, बल्कि कट्टरपंथी अलग विचारो और सोच की उपज है।

 

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Fiza Mirza

An Author, Writer.

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