ऐसी थी रजत शर्मा और अरुण जेटली की दोस्ती
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के पहले दिन अरुण जेटली ने रजत शर्मा के कन्धे पर मदद का हाँथ रखा था और वो हाँथ उन्होने मरते दम तक नहीँ हटाया। कुछ दिनों पहले ही देश ने एक ईमानदार नेता, प्रभावशाली व्यक्ति खोया तो वहीं जाने माने पत्रकार एवं आप की अदालत के वक्ता रजत शर्मा ने अपना बेहद करीबी दोस्त एवं मार्गदर्शक भी खो दिया।
अपने दोस्ती को याद करते हुए रजत शर्मा कहते हैं की ” मैने बहुत कुछ सीखा है उनसे, उनका ज्ञान, उनके सिद्धांत, उदार हृदय, सशक्त नेतृत्व क्षमता ने उनके जीवन को बहुत प्रभावित किया है।”
वो बताते हैं की 45 साल की इस दोस्ती ने हर दिन उन्हें कुछ नई प्रेरणा दी है।
“कुछ भी हो जाए लेकिन काम नहीँ रुकना चाहिये” ये अरुण जेटली का सिद्धांत था और वो जीवन भर इस पर चलते रहे। मुँह पर शिकन तो उनके तब भी नहीँ आया जब 5 वर्ष पहले से वो कैंसर से लड़ रहे थे। तब भी वो सकारत्मकता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहे। सफल छात्र जीवन, उज्ज्वल अधिवक्ता के बाद वो राजनीतिक जीवन पर उत्कृष्टता के साथ काम किया।
उन्हें राजनीति से बेहद लगाव था। उनके लिए रजत शर्मा कहते हैं ” वो देश को संघ से पहले रखते थे और स्वयम को संघ के बाद। वो कर्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे, उन्हें पद का लालच कभी नहीँ रहा”
“मैने आज तक कोई फ़ैसला उनकी सलाह के बिना नहीँ लिया। वो मेरे गाइड भी थे। आज मैने उन्हें खो दिया और ऐसा लग रहा है की अपने सर से छत खो दिया है।” कहते हुए वो आप की अदालत के उन दिनों को याद करते हैं जब 11 बार अरुण जेटली अलग अलग विषयों पर आप की अदालत के कटघरे में आए। वो कहते हैं” कभी उन्होने मुझसे यह नहीँ कहा की शो पहले डिस्कस कर लेते हैं, या ऐसा क्यों पूछा या इतने कड़वे सवाल क्यों किए। उनके दोस्ती में ये कभी आया ही नहीँ।
“सिद्धांतों के पक्के अरुण जेटली के साथ का हर दिन मेरी आँखों के सामने आरहा है। उनके जैसा नेता मैने आज तक नहीँ देखा”