हितेश पंत (नई दिल्ली)
ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे राष्ट्रमंडल खेल के पहले दिन भारत ने मेडल लिस्ट में अपनी एंट्री दर्ज करा ली है। भारत की तरफ से युवा वेटलिफ्टर पी गुरुराजा ने सिल्वर मैडल जीतकर देश का खाता खोला। भारतीय वायु सेना के कर्मचारी गुरुराजा प्रतियोगिता में एक बार मुश्किल में घिरते दिखे, लेकिन देश और परिवार की स्थिति को याद करते हुए उन्होंने पदक हासिल कर लिया।
राष्ट्रमंडल खेलों के पहले दिन वेटलिफ्टिंग के 56 किलो वर्ग मुकाबले में कुल 249 का स्कोर बनाकर रजत पदक जीता। गुरुराजा ने स्नैच में 111 और क्लीन और जर्क में 138 का स्कोर बनाया। मुकाबले में मलेशिया के इजहार अहमद ने 261 का स्कोर कर स्वर्ण पदक जीता। श्रीलंका के खिलाड़ी चतुरंगा लकमल ने 245 का स्कोर बनाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।
भारत को मुकाबले में पहला पदक दिलाने वाले 25 वर्षीय गुरुराजा कर्नाटक के छोटे से गांव कुंडूपारा के रहने वाले हैं। बेहद साधारण परिवार से आने वाले गुरुराजा के पिता ट्रक ड्राइवर हैं। बावजूद इसके पिता ने कभी बेटे की जरूरत पूरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गुरुराजा ने 2010 से वेटलिस्टिंग में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था। परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी कि सही तहर से डाइट और सप्लीमेंट की व्यवस्था हो सके। ऐसे में उन्हें परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
गुरुराजा भारतीय वायुसेना में निम्न श्रेणी के कर्मचारी हैं। उन्होंने पदक जीतने के बाद कहा कि मुकाबले के दौरान पहले दो प्रयास में जब विफल रहा तो मेरे सामने देश और परिवार के कमजोर आर्थिक हालात आए। इससे मुझे बहुत हौसला मिला और मैंने बेहतर प्रदर्शन देते हुए रजत पदक जीता। गुरुराजा का कुश्ती में भी काफी लगाव है। वे पहले कुश्ती में ही करियर बनाना चाहते थे, उनके कोच ने उन्हें वेटलिस्टिंग में आने की सलाह दी।
