संकट में है दुनिया
क्या आपको मालूम है कि, हमलोग जिस खूबसूरत दुनिया पर इंसान होने का गुमान करते हैं वहीं भारी संकट में है दुनिया | जिस तरह से इस धरती का तापमान रोज-रोज बढ़ रहा है उस हिसाब से 2050 तो तक ग्लेशियर पूरी तरह से पिघल जायेंगे| अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भूगोल के प्रोफेसर सईद नौशाद अहमद के अनुसार जलवायु परिवर्तन बहुत बड़ी समस्या है| 2050 तक ग्लेशियर पिघल जायेंगे और कार्बन उत्सर्जन 5 गुना ज्यादा बढ़ जाएगा जिस वजह से पृथ्वी नष्ट होने के कगार पर आ जाएगी|
जितनी ठंडी जगहें उतरी गोलार्ध पर हैं, वहां कई वायरस एवं जानलेवा बैक्टीरिया पनपते हैं। जलवायु परिवर्तन से गर्मी बढ़ेगी और साथ में जानलेवा बैक्टीरिया भी बढ़ेंगे| और ये बहार निकलने के साथ हवा के फैलेंगे और वातावरण में फ़ैल जायेंगे|जिसकी वजह से इंसानी जिंदगी पर नाकारत्मक असर पड़ेगा| उष्णकटिबंधीय जगहों पर कई पक्षी एवं जानवर रहते हैं। गर्मी बढऩे से यह उतरी गोलाद्र्ध में पहुंचने। इससे पूरी पृथ्वी का ईको सिस्टम बर्बाद हो सकता है।
पेड़-झाड़ियां भी बनेंगी ग्लेशियरों के लिए खतरा
असम में जिस तरह से मौसम का मिजाज बदला है, उसी तेजी से हिम रेखा खिसकती जा रही है जो जैवविविधता को बहुत नाकारत्मक प्रभाव पड़ रहा है|
हिम रेखा यानी जहां तक स्थाई तौर पर बर्फ जमी रहती थी और टिंबर लाइन यानी जहां तक पेड़ होते थे, हिम रेखा के खिसकने के इनके बीच अंतर बढ़ रहा है| ग्लेशियरों के लिए खतरा और बढ़ता चला जाएगा जब वनस्पतियां, पेड़ और झाड़ियां जिस तेजी से ऊपर की ओर बढ़ती जाएंगीं|
बिजली परियोजना पर पड़ेगा असर
अगले 33 सालों यानी 2050 तक समूचे हिमनद पिघल जाएंगे।जिसके वजह से बाढ़ और आकाल का खतरा बढ़ जायेगा| पानी का संकट गहराएगा, कृत्रिम झीलें बनेंगी। तापमान तेजी से बढ़ेगा| जिसकी वजह से खेती का खतरा भी बढ़ जायेगा और बिजली परियोजना पर खतरा बढ़ेगा| इस वजह से संकट में है दुनिया
