परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हमारे तौर तरीकों में भी समय के साथ परिवर्तन हुए हैं। हाल ही में मलावी में एक स्कूल में लड़कियों को मेन्स्ट्रुअल कप वितरित किया गया। इन्हें निम्न परेशानियों का सामना करना पड़ता था-
- ये लड़कियाँ मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीँ जाती थीं। यानी महीने में 5-7 दिन।
- ये कपड़ा इस्तेमाल करती थीं। जो अधिकतर समय दाग छोड़ जाता था।
- कई बार कपड़े को धोने के लिए साबुन नहीँ होते थे। जिससे बदबू आती थी।
ये परेशानी पूरे विश्व की है। इसी का उपाय सैनिटरी पैड्स में खोजा गया। लेकिन पैड्स की कुछ खामियाँ निम्न रही हैं –
- कीमती होने के कारण मात्र कुछ प्रतिशत माहिलाएँ ही इसका इस्तेमाल कर पाती हैं।
- इको फ्रेंड्ली ना होने के कारण प्रदूषण का कारण बनते हैं।
- रैशेस की परेशानी आम है।
- हर 4-5 घंटे में पैड ना बदलने पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। जो की इन्फेक्शन का बड़ा कारण बनते हैं।
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मेन्स्ट्रुअल कप का विकल्प खोजा गया है। ये-
- पैड की अपेक्षा सस्ते हैं। तथा एक कप लगभग 1-10 साल तक चल सकता है।
- इन्हें बार बार बदलना नहीँ पड़ता। 5-6 घंटे या रक्तस्त्राव के अनुसार इसे खाली करके फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।
- रात भर जागने की आवश्यकता नहीं और ना ही पीरियड्स के दौरान पानी से डर।
- समय समय पर इन्हें उबलते पानी से धोना होता है। जिससे बैक्टीरिया निकल जाते हैं।
- पीरियड्स के समय पैड का बंडल साथ रखने की आवश्यकता नहीँ।
- रैशेस से छुटकारा।
- इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। लोगों को लगता है की कहीं ये फँस ना जाए। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीँ है।
- हर महीने पैड खरीदने की परेशानी से छुटकारा।
मेन्स्ट्रुअल कप सस्ता, सुरक्षित और बेहतर तरीका है। मुश्किल दिनों में भी खुल कर जीने में ये मदद करता है। इसकी कीमत 300 से शुरु होती है, जो अलग अलग कम्पनियों ने अलग अलग रखे हैं। इसके इस्तेमाल करने का तरीका आप इंटरनेट में आसानी से पा सकती हैं।
