संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत रिलीज हो गई है और उसके ज्यादातर शो हाउसफुल जा रहे हैं। करणी सेना के तमाम विरोध के बाद भी दर्शक बिना डरे सिनेमा घरों में पहुंच रहे हैं। फिल्म देखने के बाद भी ये स्पष्ट हो जाता है कि इसमें ऐसा कुछ भी विवादास्पद नहीं है जिसको लेकर करणी सेना ने इतना उत्पात मचाए रखा। करीब 30 साल पहले भी छोटे पर्दे पर पद्मावती आयी थी, लेकिन तब माहौल ऐसा नहीं था।
भंसाली की पद्मावत फिल्म को लेकर ही देश में इतना बवाल क्यों हुआ ये समझ से परे है। जबकि ये कोई पहला मौका नहीं था जब चित्तौड़ या रानी पद्मावती को लेकर कोई फिल्म या सीरियल बना हो। इससे पहले भी साल 1988 में रानी पद्मावती पर एक खास एपिसोड बना था। दूरदर्शन पर आने वाले भारत एक खोज कार्यक्रम में भी पद्मावती की कहानी दिखाई जा चुकी है। कार्यक्रम के 26वें एपिसोड में चित्तौड़ की इस कहानी को दिखाया गया था, जिसमें अभिनेता ओम पुरी ने अलाउद्दीन खिलजी का रोल किया था और सीमा केलकर पद्मावती बनीं थीं।
इस कार्यक्रम में भी खिलजी का वही वहशीपन और सनक दिखाई गई थी जो फिल्म पद्मावत में दिखती है। इतना ही नहीं इस एपिसोड में घूमर डांस भी दिखाया गया था। श्याम बेनेगल इस कार्यक्रम के डायरेक्टर और संजय लीला भंसाली असिस्टेंट एडिटर थे। उस दौरान ये कार्यक्रम बहुत हिट रहा था। किसी समुदाय या क्षेत्र के लोगों ने इसका विरोध नहीं किया, बल्कि लोगों ने इस एपिसोड को काफी पसंद किया। इस कार्यक्रम में भी खिजली रानी पद्मावती को पाने की चाह में हजारों सैनिकों के होते हुए भी निहत्था हो जाता है।
आज जब पद्मावत फिल्म आने के बाद करणी सेना जैसे संगठन गैरकानूनी तरह से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध के नाम पर स्कूल बसों, गाड़ियों, दुकानों को अपना निशाना बना रहे हैं। तब ये बात समझ से परे हो जाती है कि उस दौर में रानी पद्मावती पर बने कार्यक्रम का विरोध क्यों नहीं हुआ। करणी सेना इस बार ही क्यों फिल्म पद्मावत के खिलाफ है। जबकि फिल्म के किसी सीन में न तो रानी पद्मावती के चरित्र पर कोई उंगली उठाई गई है, न ही राजपूतों की शान के खिलाफ कुछ दिखाया गया है।
30 साल पहले दूरदर्शन पर आयी थी पद्मावती, जानिए क्या हुआ था तब