दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट के शिखर पर बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के दस बार चढ़ने वाले नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही अंग रीता शेरपा का निधन हो गया। वह 72 साल के थे। सोमवार को अंग रीता शेरपा ने अंतिम सांस ली। उनका निधन काठमांडो स्थित आवास पर हुआ। वह लीवर की खराबी सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित थे।
स्नो लेपर्ड के नाम से थे मशहूर अंग रीता शेरपा
शेरपा को उनकी फुर्ती और जज़्बे के वजह से उन्हें ‘स्नो लेपर्ड (हिम तेंदुआ)’ के नाम से जाना जाता था। समुद्रतल से 8850 मीटर की ऊंचाई पर ऑक्सीजन अत्यंत कम हो जाती है। ऐसे में 10 बार बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के चड़ाई करना आम आदमी के बस का तो नहीं है।
Very sad on untimely demise of Ang Rita Sherpa, Guinness Record Breaker who summitted Everest 10 times without supplemental oxygen. Agile, tough & fondly referred to as “Snow Leopard”, a man who knew his mountains well. Prayers, love & deepest condolences. Industry grieves today. pic.twitter.com/06574W7TR4
— Nepal Tourism Board (@nepaltourismb) September 21, 2020
नेपाल पर्वतारोहण संघ के सचिव टीकाराम गुरुंग ने कहा, ‘शेरपा एक महान पर्वतारोही थे जिन्होंने 1983 से 1996 के बीच दस बार ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना माउंट एवरेस्ट को फतह किया था। सोमवार को उनका निधन हो गया।’
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है अंग रीता शेरपा का नाम
दिग्गज पर्वतारोही के नाम अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड्स है। आपको बता दें कि शेरपा को प्रतिष्ठित गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना 8,848 मीटर ऊंची माउंट एवरेस्ट पर सबसे ज्यादा पर सफलतापूर्वक फतह करने के लिए दिया गया था।
ठंड के मौसम में भी बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के फतह किया था माउंट एवरेस्ट को
जी हां, अंग रीता शेरपा ने ठंड के मौसम में भी बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के माउंट एवरेस्ट को फतह कर लिया था। हड्डियो को गला देने वाली ठंड में भी अंग रीता शेरपा ने अपना कमाल दुनिया को दिखाया और सबको चकित कर दिया। बात दिसंबर 1987 की है, जब अंग रीता ने ठंड के मौसम में ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना एवरेस्ट फतह करने वाले पहले व्यक्ति बनने पर भी उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया था। उनके इस कारनामे से सारी दुनिया हैरान रह गई थी। आखिर ऐसे ही नहीं उन्हें स्नो लेपर्ड के नाम से जाना जाता था।
