जानकारी के अनुसार हिन्दू पंचाग या कैलेण्डर का अंतिम माह फाल्गुन है। जो अंग्रेजी कैलेण्डर के हिसाब से फरवरी व मार्च में आता है। इसके बाद हिन्दू कैलेण्डर का नया साल चैत्र मास से शुरू होते है। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास का अपना महत्व है। फाल्गुन मास का भी अपना महत्व है। हिन्दू धर्म में मास का परिवर्तन चंद्र चक्र पर निर्भर करता है। चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है। उसी नक्षत्र के आधार पर उस मास का नाम रखा जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को चंद्रमा फाल्गुनी नक्षत्र में रहता है। इसलिए इस मास को फाल्गुन मास कहा जाता है।
गर्मी का मौसम हो जाता है शुरू
आपको बता दें कि फाल्गुन मास से धीरे-धीरे गर्मी का मौसम शुरू हो जाता हैं, सर्दी कम होने लगती है। हिंदू धर्म के त्योहार होली व महाशिवरात्रि फाल्गुन के महीने में ही मनाए जाते हैं। यह कहा जा सकता है कि होली के पर्व के साथ ही एक सौर वर्ष का समापन होता है। सौर धार्मिक कैलेंडर में, फाल्गुन का महीना सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ शुरू होता है। इस महीने में होली, विजय एकादशी, फुलेरा दूज, महाशिवरात्रि आदि पर्व मनाए जाते हैं। क्या आपको ये पता है कि इस मास में भगवान कृष्ण और राधा जी की पूजा ज्यादा होती है।
ये है फाल्गुन मास के प्रमुख त्योहार
● 6 मार्च : विजया एकादशी
● 8 मार्च : महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत
● 10 : फाल्गुन अमावस्या,
● 12 मार्च : फुलेरा दूज
● 20 मार्च : आमलकी एकादशी
● 24 मार्च : होलिका दहन
25 मार्च : धुलंडी