हितेश पंत (नई दिल्ली)
जम्मू कश्मीर की जंस्कार वैली में आजकल एक बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है। तेज रफ्तार बहने वाली जंस्कार नदी को आजकल लोग चलकर पार कर रहे हैं। उलझिए मत, असल में ये नदी ठंड की वजह से पूरी तरह जम गई है। लोगों को नदी पार जाने के लिए बर्फ पर चलकर जाना होता है।
जंस्कार वैली में पहचान मानी जाने वाली जंस्कार नदी की ये खासियत है कि हर साल सर्दियों में ये नदी कम तापमान के कारण जम जाती है। ये नदी लेह से जंस्कार तक बहती है। नदी की कुल लंबाई करीब 105 किमी है। नदी जम जाने के कारण जंस्कार वैली अन्य क्षेत्रों से अलग थलग हो जाती है। लोगों के पास बर्फीली नदी को चलकर पार करना ही विकल्प रहता है। जंस्कार वैली में रहने वाले लोग ट्रैकिंग करके एक पार से दूसरे पार जाते हैं। 105 किमी लंबी नदी को पार करने में लोगों को करीब एक हफ्ता लग जाता है। एक दिन में लोग 16 किमी की दूरी ही बर्फ पर चलकर पार कर पाते हैं।
जंस्कार वैली के लोगों के लिए ये बेहद कठिनाई के दिन होते हैं, लेकिन पर्यटकों के लिए ये किसी एडवेंचर से कम नहीं होता। यहां पर्यटन बर्फीली नदी में पैदल चलने का के लिए आते हैं। नदी पर जमीं बर्फ को चादर कहा जाता है। इस कारण नदी में पैदल चलने को चादर ट्रैकिंग नाम दिया गया है। चादर ट्रैकिंग को पर्यटक एडवेंचर गेम की तरह लेते हैं।
पिछले कुछ सालों से चादर ट्रैंकिग पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय एडवेंचर एक्टिविटी साबित हो रहा है। नदी के पूरी तरह जम जाने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार इज़ाफा हो रहा है। सामान्यतया जनवरी और फरवरी के महीने में जंस्कार नदी बर्फ की तरह जमी रहती है।


