हितेश पंत (नई दिल्ली)
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाना हर युवा का सपना होता है। यहां सफलता पाने के लिए उम्मीदवार जी तोड़ मेहनत करते हैं। सिविल सेवा से आईएएस, आईएफएस, आईपीएस और केंद्र सरकार की अन्य सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है। परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर उम्मीदवारों को सेवाओं का आवंटन होता है। अक्सर युवा सिविल सेवा के इन कैडर को लेकर कुछ असमंजस में रहते हैं। यहां हम आपको इन सेवाओं से संबंधित जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आप कंफ्यूजन दूर कर सकते हैं।
सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करते समय यूपीएससी उम्मीदवारों से सेवाओं के संदर्भ में रुचि जानता है। उसके बाद परीक्षा परिणाम में रैंकिंग के अनुसार उम्मीदवारों को सेवाओं का आवंटन किया जाता है। आईएफएस यानी भारतीय विदेश सेवा के लिए पदों की संख्या सीमित होती है। सामान्यत टॉप रैंक पाने वाले इच्छुक उम्मीवारों को ही ये सेवा मिल पाती है। इसके बाद युवाओं की पसंद आईएएस यानी भारतीय प्रशासनिक सेवा होती है। उसके बाद युवा आईपीएस यानी भारतीय पुलिस सेवा को चुनते हैं।
आईएफएस (भारतीय विदेश सेवा) – भारत के विदेशी कामकाज की रूपरेखा भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी तैयार करते हैं। विदेशी मामलों के सारे कामकाज इनकी जिम्मेदारी में होते हैं। विदेश मंत्रालय या विदेशों में भारतीय दूतावासों पर इन अधिकारियों की नियुक्ति होती है। देश या विदेश में रहते हुए ये अधिकारी भारत और दूसरे देशों के द्वीपक्षीय मामलों पर काम करते हैं।
आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा)- आईएएस अधिकारियों के पास कई विशेषाधिकार होते हैं। इनकी गिनती टॉप ब्यूरोक्रेट्स में होती है। इसलिए शुरुआती रैंक पाने वाले उम्मीदवारों को ही आईएएस कैडर मिल पाता है। देश और राज्य के लिए नई नीतियां या कानून बनाना या उसे लागू कराने का काम आईएएस अधिकारी करते हैं। इसके अलावा केंद्र या राज्य में अपने क्षेत्र के देखरेख की पूरी जिम्मादारी इन्हीं की होती है।
आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) – केंद्र और राज्यों में कानून व्यवस्था संभालने का जिम्मा आईपीएस अधिकारियों का होता है। कानून के अनुसार देश में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये नीति और नियम तैयार करते हैं और उन्हें लागू कराते हैं। एसपी, आईजी से लेकर डीजीपी या कमिशनर के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की तैनाती की जाती है।