सर्दी की मखमली शामों के बीच उर्दू के दिवानों का तीन दिनी मेला जश्न-ए-रेख्ता रविवार को विदा हो गया। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में जमी उर्दू की इस महफिल में दिल्ली ही नहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी ठंड के बावजूद डटे रहे। तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग भागों से आए अदीब, शायरों, लेखकों, कलाकारों, गायकों और फ़िल्म से जुड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया।
समापन के दिन की शुरूवात सूफी कलाम और दास्तानगोई से हुई। इसके बाद मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने उर्दू के मौजूदा हालात पर तफ्तीश से जानकारी दी। उन्होंने पति – पत्नी के रिश्तों को भी गंभीरता से समझाते हुए कहा कि इस रिश्ते की देखरेख करने की जिम्मेदारी पति – पत्नी दोनों की है। दोनों को एक दुसरे के प्रति पूरा आदर भाव रखना चाहिए। कार्यक्रम में अभिनेता अन्नु कपूर के विचारों को सुनने भी काफी संख्या में लोग जुटे।
तीसरे दिन के कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण रही लंदन से आयी तान्या वेल्स और जर्मनी की पाउलो की जोड़ी ने अपनी गजलों से समां बांध दिया। इन्होंने जैसे ही ‘आज जाने की ज़िद न करो’ गाना शुरू किया तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया। निजामी बंधुओं की बेहतरीन कव्वाली से इस हसीन महफिल को विदाई दी गयी।
