मूवी रिव्यू शिकारा – एक सामाजिक सौहार्दपूर्ण, काल्पनिक बॉलीवुडिया लव स्टोरी

मूवी रिव्यू शिकारा

मूवी रिव्यू शिकारा – पिछले महीने 19 तारीख को 4 लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितों के उनके ही घर से जबरदस्ती पलायन की 30वीं वर्षगांठ थी. उनकी असली कहानी पूरे देश को, पूरी दुनिया को सुनना जरूरी है. लेकिन यहां विधु विनोद चोपड़ा आपको फिल्म के पहले दृश्य से ही निराश करते हैं, फिल्म के डिस्क्लेमर में ही फिल्मकार ने लिख दिया कि यह कुछ असल घटनाओं पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है, और जब आप इस फिल्म को देखते हैं तो आपको यकीन हो जाता है कि वाकई यह एक काल्पनिक कहानी है।

मूवी रिव्यू शिकारा

Movie Review Shikara

जब मैंने सबसे पहले इस फिल्म के बारे में सुना था तब मुझे भी वो कहानी देखनी थी जिसका साक्षी मैं खुद नहीं बन पाया, ना कि कोई बॉलीवुड स्टाइल लव स्टोरी। शिकारा की कहानी एक कश्मीरी पंडित जोड़े की कहानी है, शिव कुमार धर(आदिल खान) और शांति(सादिया), कैसे दोनों प्यार में पड़ते हैं, शादी करते हैं और एक घर बनाते हैं जिसका नाम शिकारा रखते हैं। फिल्म के मुताबिक कश्मीरी पंडितों के भयावह पलायन की कहानी शुरू होती है शिव के दोस्त(जो कि एक मुस्लिम है) के पिता एक राजनैतिक रैली के दौरान मारे जाते हैं। उसके एक साल बाद कश्मीरी पंडितों के नामों की “हिटलिस्ट” लगनी शुरू हो जाती है। इसके बाद भटके हुए नौजवान कश्मीर में दंगा कर कश्मीरी पंडितों को उनके घरों से भगाना शुरू कर देते हैं। शरणार्थियों के कैम्प्स के कुछ दृश्य आपको जज्बातों से भर देते हैं। फिल्म अपने प्लॉट से भटकती भी दिखती है जैसे कि एक सीन में शिव कुमार धर, राम जन्म भूमि आंदोलन से जुड़ी एक टिप्पणी करते दिखते हैं। शरणार्थी कैम्प्स के कुछ और दृश्यों के साथ फिल्म का फर्स्ट हाफ खत्म हो जाता है। फिल्म के दूसरे हाफ में कश्मीरी पंडितों की पीड़ा कहीं नहीं दिखती बस शिव कुमार धर और शांति की प्रेम कहानी दिखाई जाती है। फिल्म बहुत बड़े स्तर पर काल्पनिक है और असलियत से बहुत दूर। कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार बिना संदर्भ के यूंही शुरू हो जाता है। अत्याचार के पीछे की कहानी पूरी फिल्म में कहीं नहीं मिलती। असल में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ जो नारे लगाए गए और चरमपंथी नफरत फिल्म में नहीं है। ऑनस्क्रीन बहुत ही कम खून खराबा है।

Read in English

 

Movie Review Shikara

जहां तक एक काल्पनिक कहानी की बात है, फिल्म बहुत बढ़िया तरह से बनाई गई है। मूवी रिव्यू शिकारा – फिल्म में कश्मीर की खूबसूरत लोकेशंस हैं। शरणार्थी कैंप और असल घटना की टाइमलाइन को बहुत अच्छे से पुनर्सृजित किया है। फिल्म के फर्स्ट हाफ में कश्मीरी संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने मिलती है। फिल्म में हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द भी कई जगह देखने मिलता है। फिल्म के मुख्य किरदार(जो कि कश्मीर से हैं) अपने अपने किरदार अच्छे से निभाते हैं। एआर रहमान और कुतुब-ए-कृपा ने फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर के सृजन में दिल से काम किया है। फिल्म के गाने सही जगह पर रखे गए हैं और बोल सुंदरता से लिखे हैं। विधु विनोद चोपड़ा जहां डायरेक्टर का काम तो बहुत अच्छे से करते हैं लेकिन बतौर लेखक आपको निराश करते हैं, क्योंकि यह कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी नहीं है। हालांकि फिल्म आपको सोचने पर मजबूर जरूर करती है। फिल्म आपको स्याह जज्बातों से भरने के बाद भी पूरी कहानी नहीं कहती।

 

मूवी रिव्यू शिकारा – ट्रेलर देखें

मूवी रिव्यू शिकारा – अगर आपको अच्छे दृश्यों, जज्बातों के उथल पुथल से भरी, कश्मीरी संस्कृति की झलक दिखाती फिल्म देखनी है तो यह फिल्म आपके लिए है। सब कुछ देखने के बाद कहा जा सकता है कि शिकारा एक अच्छी काल्पनिक फिल्म है ना कि कश्मीरी पंडितों की अनकही कहानी।

Swapnil Vijay Tiwari

Motion Graphics Designer by Profession. A Poet and Writer by Passion.

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

IND vs SA Head To Head in T20’S IPL 2022: STAT TRACKER