माता-पिता और शिक्षक बच्चों को अखबार पढ़ने के लिए कितना भी कहते रहें, लेकिन उनमें से बहुत से बच्चे ऐसे होते हैं जिन्हे अखबार पढ़ने में अधिक रुचि नहीं होती हैं। बच्चों को हमेशा कहा जाता है कि वे वर्तमान मामलों पर अपने ज्ञान के साथ-साथ अपनी शब्दावली को अपडेट करने के लिए रोजाना अखबार पढ़ें। लेकिन क्या हम उन्हें वो समाचार पत्र पढ़ा सके जो हम रोज़ खुद पढ़ते, हमे पहले अपने समाचार पत्र पर एक नज़र दाल लेनी चाहिए। क्या उन अखबारों की भाषा, चित्र या सामग्री बच्चो के लिए सुलभ है?
जिस तरह बच्चों के लिए किताबें एक तरह से उनके उम्र के मुताबिक बनाई जाती हैं, वैसे ही उनके समाचार पत्र भी अगर हम वाकई बच्चों को पढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें अनुकूलित करने की ज़रूरत है की नहीं?
हमें भारत में बच्चों के समाचार पत्र पढ़ाने की आवश्यकता क्यों है?
समाचार पत्र रॉबिनएज (राज अरोरा द्वारा प्रकाशित) से रिद्धिमा कृष्णमूर्ति, का मानना है कि बच्चों को सनसनीखेज समाचारों या अश्लील चित्रों से दूर रखने की आवश्यकता है। उन्हें ऐसी सामग्री से अवगत कराया जाना चाहिए जो चीजे उनकी समझ के प्रति संवेदनशील हो। बच्चों के लिए समाचारपत्र केवल उनके बारे में नहीं होना चाहिए जो वे पढ़ते हैं बल्कि उन्हें यह भी सीखना चाहिए कि वे एक निश्चित जानकारी की व्याख्या कैसे करते हैं। और यह माता-पिता को एक नियमित समाचार पत्र बच्चो को पढ़कर उनमे उजागर करना चाहिए।
बच्चों का अखबार बाकी से अलग कैसे है?
अन्य समाचार पत्रों के विपरीत, बच्चों के समाचार पत्र को आकर्षक तरीके से प्रासंगिक, आयु-उपयुक्त सामग्री प्रस्तुत करने के लिए डिज़ाइन किया होने चाहिए। उदाहरण के लिए, साजिद सय्यद द्वारा स्थापित किड्स एज नामक एक समाचार है जिसमे वो खेल, पहेली से लेकर विषयों तक, विज्ञान से लेकर योग्यता तक, बच्चों के लिए प्लेस्कूल से लेकर रेटिंग तक के अलावा इंटरेक्टिव स्पेस प्रदान करता है। इस तरह का अखबार बच्चो के लिए होनाचाहिए जिसे उन्हें पढ़ते समय उन्हें जानकारी प्राप्त तो हो बल्कि साथ में मज़ा भी आए।
अपने बच्चे को अखबार पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करें
1. शुरूवात करने के लिए, अपने बच्चे के साथ रोज़ अखबार पढ़ें।
2. माता-पिता अपने बच्चों को कम से कम एक या दो पेज रोज़पढ़ने के लिए प्रेरित करके प्रोत्साहित कर सकते हैं।
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