यूँ तो बचपन से हर इंसान को यही सिखाया जाता है कि दूसरो के साथ अच्छा व्यव्हार करो और कभी किसी का बुरा न करो। वही दूसरी तरफ चाणक्य का कहना है कि इंसान बुरा बनने के बाद ही सफल हो सकता है। अब चाणक्य ने ऐसा क्यों कहा ये तो आपको खुद इसे पढ़ने के बाद पता चल ही जाएगा। दरअसल चाणक्य का मानना है कि अगर इंसान गुड़ की तरह मीठा और सरल बना रहेगा तो दुनिया उसे यक़ीनन निगल जाएगी। अब आप खुद ही सोचिए कि जो पेड़ सबसे सीधे होते है, उन्हें सबसे पहले काट दिया जाता है। इसलिए इंसान को थोड़ा सा बुरा भी बनना चाहिए, ताकि लोग उसे काट न सके।
बुरा बनने के बाद..
इसके इलावा चाणक्य का कहना है कि कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है, जब इंसान को बुरा बनना ही पड़ता है। वो इसलिए क्यूकि अगर आप लोगो से दब कर रहेंगे तो वह आपको और ज्यादा दबाएंगे। यानि इंसान को कभी भी अपना आत्म सम्मान भूल कर नहीं जीना चाहिए। फिर भले ही बात अपनों की हो या गैरो की, लेकिन जहाँ इंसान बिना किसी वजह से झुक जाएँ, वहां वह यक़ीनन कमजोर पड़ ही जाता है।
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इसलिए अगर जीवन में सफलता हासिल करना चाहते है, तो स्थिति के अनुसार खुद को थोड़ा सा बुरा बना लीजिये, क्यूकि बुरा बनने के बाद ही आप लोगो को अपना नजरिया ठीक से समझा पाएंगे। वरना लोग आपको कच्चा खा जायेंगे। हालांकि ये बात थोड़ी सी कड़वी है, लेकिन ये बात एकदम सही है। वो ये कि सरल व्यव्हार वाला व्यक्ति अधिक समय तक इस जमाने के साथ नहीं चल पाता। इसलिए जमाने को समझ कर अपनी नीति अपनाएं और खुद को सफल बनाएं।


