शिव में बसता पूरा संसार है, इस सत्य को नहीं बदल सकता कोई

शिव में बसता पूरा संसार

हिन्दू धर्म में वैसे तो करोड़ों देवी देवता है, लेकिन जिन्होंने इस संसार की रचना की थी, वह शिव जी ही है। जी हां ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर इन्हें त्रिमूर्ति के रूप में ही पूजा जाता है। वास्तव में महेश्वर भगवान् शिव जी का ही दूसरा नाम है और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भगवान् शिव को ही इस सृष्टि का रचियता माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें मोक्ष प्राप्ति का देवता भी माना जाता है। यानि सिर्फ शिव में बसता पूरा संसार है और इनकी लीला सच में अपरम पार है। कहते है कि शिव जी के अंदर जीवन और मृत्यु का ज्ञान भंडार छिपा हुआ है। शायद यही वजह है कि जब लोगों का अंतिम समय नजदीक आता है, तब उनके मुँह में वही गंगाजल डाला जाता है, जिसकी धारा शिव जी के अंदर समाई हुई है। इससे मरने वाले की आत्मा को मुक्ति मिल जाती है।

 शिव में बसता पूरा संसार

शिव में बसता पूरा संसार है..

बता दे कि शिव जी अकेले ऐसे देवता है जिन्हें श्रावण मास के रूप में पूरा एक महीना समर्पित किया जाता है। इस दौरान उनकी खूब पूजा अर्चना और आराधना की जाती है। हिन्दू धर्म के अनुसार शिव जी को शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है और पूजा के दौरान शिव जी को पवित्र जल, दूध, बेल पत्र, भस्म, दही, शहद और भांग आदि सब चीजें अर्पित की जाती है। ये सब चीजें अर्पित करने के बाद शिवलिंग की परिक्रमा भी की जाती है। यूँ तो कुछ लोग शिवलिंग की पूरी परिक्रमा करने में विश्वास रखते है, लेकिन हम आपको बता दे कि शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग की अधूरी परिक्रमा ही करनी चाहिए। वो इसलिए क्यूकि शिव जी अनादि और अनंत है।

 शिव में बसता पूरा संसार

ऐसा कहा जाता है कि भगवान् शिव में प्रचंड ऊर्जा समाहित है। ऐसे में न तो कोई इस ऊर्जा के बीच आ सकता है और न ही कोई इसके प्रवाह को रोक सकता है। एक कथा के अनुसार एक बार शिव जी के महाभक्त राजा गंर्धव ने जलाभिषेक के दौरान निर्मली को पार कर लिया था। जिसके परिणाम स्वरूप उन्होंने अपनी पूरी शक्ति और बुद्धिमता सब कुछ खो दिया था।

दरअसल निर्मली शिवलिंग का ही धार्मिक भाग है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि निर्मली के प्रवाह में अवरोध से बचने के लिए शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए और इस परिक्रमा को कभी पूरा नहीं करना चाहिए। हालांकि शिव की शक्ति के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन शिव जी अपने भक्तों पर केवल तभी क्रोध दिखाते है, जब कुछ गलत हो रहा हो। याद रखे कि शिव में बसता पूरा संसार है और हम सब इसी संसार का हिस्सा है। तो जीवन में कभी कुछ ऐसा न करे, जिसके लिए आपको बाद में पछताना पड़े।

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हिन्दू धर्म में वैसे तो करोड़ों देवी देवता है, लेकिन जिन्होंने इस संसार की रचना की थी, वह शिव जी ही है। जी हां ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर इन्हें त्रिमूर्ति के रूप में ही पूजा जाता है। वास्तव में महेश्वर भगवान् शिव जी का ही दूसरा नाम है और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार भगवान् शिव को ही इस सृष्टि का रचियता माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें मोक्ष प्राप्ति का देवता भी माना जाता है। यानि सिर्फ शिव में बसता पूरा संसार है और इनकी लीला सच में अपरम पार है। कहते है कि शिव जी के अंदर जीवन और मृत्यु का ज्ञान भंडार छिपा हुआ है।
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Rajni Goyal

कहते है शब्दों को नाप तोल कर बोलने का काम जरा मुश्किल होता है, लेकिन हम तो वो है जो शब्दों को केवल नाप तोल कर ही नहीं बल्कि हर शब्द को हया की शुखियों में लपेट कर फूलो की तरह तरह चुन चुन कर लिखते है। यही हमारी पहचान भी है और यही हमारा हुनर भी..

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