भारत के उत्तरप्रदेश राज्य के आगरा शहर में बनी ऐतिहासिक इमारत ताजमहल, शाहजहां की बेशुमार मोहब्बत का सबूत है। इतिहास के पन्नों में इसकी ख़ास बातें लिखी हुई हैं, लेकिन कुछ ऐसे अन्य राज़ हैं जिससे हम आप गुमशुदा हैं।
निर्माण
ताजमहल के निर्माण में 22 साल लगे थे। 22,000 से ज्यादा मजदूरों ने अपनी कला और मेहनत से इसे खड़ा किय था।1,000 हाथियों के जरिए इसके निर्माण सामग्री को लाया गया था। उस वक्त 3.2 करोड़ रुपए का खर्च इसको बनवाने में लगा था।
कहां से आए थे कीमती रत्न व पत्थर
इस सफ़ेद चमचमाती इमारत को बनवाने खातिर विभिन्न एशियाई देशों से बहुमूल्य पत्थरों को लाया गया था। 28 तरह के रत्नों को श्रीलंका से लेकर चीन और भारत के विभिन्न राज्यों से लाया गया था। संगमरमर के सफेद पत्थर को राजस्थान से लाया गया था। तिब्बत से नीला रत्न, श्रीलंका से पन्ना, पंजाब से जैस्पर और क्रिस्टल को चीन से मंगाया गया था।
ख़ास बातें
ताजमहल की वास्तु शैली में फारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला का मिश्रण है। ताजमहल का निर्माण 1632 ईश्वी में शुरू हुआ था और 1653 में गुम्बद बनकर तैयार हुआ।
एक और खास बात यह है कि, ताजमहल अलग अलग समय में अलग अलग रंगों में नज़र आता है। सुबह में हल्का गुलाबी, शाम को दूध जैसा सफ़ेद और रात को हल्का सुनहरा नज़र आता है।
ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की कब्र के ठीक ऊपर खूबसूरत लैंप टंगा है। ये लैंप मिस्र के सुल्तान बेवर्सी द्वितीय की मस्जिद में लगे लैंप की नकल है। इसे तैयार करवाने में 108 साल पहले 15 हजार रुपए खर्च हुए थे। इससे पहले यहां धुएं वाला लैंप जलता था। इससे पूरे मकबरे में धुआं भर जाता था। तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन जब 18 अप्रैल, 1902 को आगरा पधारे और मकबरे में गए तो उन्हें वहां धुएं से काफी परेशानी हुई थी।
क्या आपको पता है ये अनोखी बात
मुमताज के मकबरे की छत से टपकते पानी की बूंद के पीछे कई कहानियां प्रसिद्ध हैं, जिसमें से एक ये है कि, जब शाहजहां ने सभी मज़दूरों के हाथ काट दिए जाने की घोषणा की ताकि वे कोई और ऐसी खूबसूरत इमारत न बना सकें तो मजदूरों ने इसकी छत में एक छेद छोड़ दिया ताकि शाहजहां का खूबसूरत सपना पूरा न हो सके।
ताजमहल ने की पहल, जानें कैसी सुविधा प्रदान करने वाला है ये स्मारक
द्वितीय विश्व युद्ध, 1971 भारत-पाक युद्ध और 9/11 के बाद इस भव्य इमारत की सुरक्षा के लिए ASI ने ऐतिहासिक इमारत ताजमहल के चारों तरफ़ बांस का सुरक्षा घेरा बनाकर उसे हरे रंग की चादर से ढंक दिया था। ताकि ताजमहल दुश्मनों की नज़र से बचा रहे।
