आपने अक्सर फिल्मों में ये डायलॉग सुना होगा कि किस्मत बदलते देर नहीं लगती। बता दे कि इस टीवी एक्ट्रेस ने इस डायलॉग को सच बना दिया। जी हां यह एक्ट्रेस महज सोलह सौ रूपये लेकर मुंबई घूमने आई थी और किस्मत ने इसे करोड़ों की मालकिन बना दिया। दरअसल हम यहाँ किसी और की नहीं बल्कि टीवी एक्ट्रेस सुरभि चंदना की बात कर रहे है। आपको जान कर हैरानी होगी कि एक समय वो भी था, जब सुरभि थोड़ी गरीबी में जिंदगी व्यतीत करती थी। फ़िलहाल वह स्टार प्लस के शो संजीवनी में मुख्य किरदार निभा रही है।
मुंबई घूमने आई थी केवल सोलह सौ रूपये लेकर..
बहरहाल एक इंटरव्यू के दौरान सुरभि ने बताया कि वह कॉलेज की पढ़ाई खत्म करके दिल्ली से मुंबई आई थी। तब उनके पास सोलह सौ रूपये ही थे। ऐसे में मुंबई पहुँचते ही वह सीधा तारक मेहता शो के सेट पर शूटिंग देखने के लिए पहुँच गई। बस तभी उनकी किस्मत बदल गई। बता दे कि सुरभि तो वहां केवल शूटिंग देखने के लिए गई थी, लेकिन शो के डायरेक्टर ने उन्हें केमियों के रोल के लिए सेलेक्ट कर लिया। अब ये तो सब को मालूम ही है कि इस शो में स्वीटी का किरदार उन्होंने ही निभाया था। गौरतलब है कि इस शो में काम करने के बाद सब ने उन्हें एक्ट्रेस बनने की सलाह दी।
यही वजह है कि सुरभि के मन में भी एक्ट्रेस बनने की इच्छा जाग गई। जिसके बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सोची। बता दे कि इस शो के बाद उन्होंने कबूल है सीरियल में भी काम किया था। इसके बाद उन्होंने इश्कबाज और दिल बोले ओबरॉय जैसे कई प्रसिद्ध शो में भी काम किया। यहाँ तक कि इन सभी सीरियल्स से सुरभि को बहुत ज्यादा पहचान और प्रसिद्धि भी मिली। आज वह टीवी इंडस्ट्री में दस साल पूरे कर चुकी है और काफी शोहरत भरी जिंदगी बीता रही है। अब यूँ तो सुरभि मुंबई घूमने आई थी, लेकिन तब उन्हें भी ये नहीं मालूम था कि उनकी किस्मत में इतना सब कुछ लिखा है।
मुंबई घूमने आई थी केवल सोलह सौ रूपये लेकर, किस्मत ने ली ऐसी करवट कि बना दिया करोड़ों की मालकिन Youth Express
Description
आपने अक्सर फिल्मों में ये डायलॉग सुना होगा कि किस्मत बदलते देर नहीं लगती। बता दे कि इस टीवी एक्ट्रेस ने इस डायलॉग को सच बना दिया। जी हां यह एक्ट्रेस महज सोलह सौ रूपये लेकर मुंबई घूमने आई थी और किस्मत ने इसे करोड़ों की मालकिन बना दिया। दरअसल हम यहाँ किसी और की नहीं बल्कि टीवी एक्ट्रेस सुरभि चंदना की बात कर रहे है। आपको जान कर हैरानी होगी कि एक समय वो भी था, जब सुरभि थोड़ी गरीबी में जिंदगी व्यतीत करती थी।
कहते है शब्दों को नाप तोल कर बोलने का काम जरा मुश्किल होता है, लेकिन हम तो वो है जो शब्दों को केवल नाप तोल कर ही नहीं बल्कि हर शब्द को हया की शुखियों में लपेट कर फूलो की तरह तरह चुन चुन कर लिखते है। यही हमारी पहचान भी है और यही हमारा हुनर भी..