हितेश पंत (नई दिल्ली)
सालों से सरकारी आवास पर काबिज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने आखिर आवास खाली कर दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अखिलेश यादव और मायावती से बमुश्किल सरकारी आवास खाली कराया गया। यूपी के इन कद्दावर नेताओं से आवास खाली करना का आदेश तो सुप्रीम कोर्ट का था, लेकिन वीआईपी कल्चर के खिलाफ इस लड़ाई के असली नायक 75 साल के एक रिटायर्ड अधिकारी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों वीआईपी कल्चर के खिलाफ एक आदेश देते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसकी पहल की उत्तर प्रदेश के एक समाजसेवी एसएस शुक्ला ने। एसएन शुक्ला एक रिडायर्ड आईएएस अफसर होने के साथ ही वकील भी हैं। 75 साल की उम्र में भी समाज की बेहतरी के लिए लड़ते रहते हैं।
एसएन शुक्ला को सरकारी सेवा से रिटायर हुए 15 साल हो गए हैं। लेकिन देश और समाज सेवा का जज्बा आज भी बरकरार है। आईएएस रहते हुए भी शुक्ला जी ने समाज हित में कई फैसले लिए। पीडब्ल्यूडी, राजस्व और सिंचाई जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में शुक्ला जी ने लोगों के हित को सर्वोपरि रखा। यूपी में वीपी सिंह, एनडी तिवारी, कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह जैसे मुख्यमंत्रियों की सरकार में उनके काम की काफी प्रसंशा होती रही।
2003 में शुक्ला जी रिटायर हुए तो समाज सेवा के लिए एनजीओ से जुड़ गए। लोक प्रहरी नाम के इस एनजीओ में रिटायर्ड, जज जैसे संभ्रांत लोग जुड़े हैं। इस एनजीओ ने पहले भी समाज की बेहतरी के लिए कई प्रयास किए हैं। इन्हीं की पहल पर अपराध में सजा काट रहे सांसद व विधायकों को सजा के दौरान उनके अधिकार छीन लिए गए। इसके अलावा भी समय-समय पर ये एनजीओ लोगों की हित की लड़ाई लड़ता है।
एसएन शुक्ला की पहल के बाद ही मुलायम सिंह, राजनाथ सिंह, एनडी तिवारी, अखिलेश यादव, मायावती जैसे पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने बंगले खाली करने पड़े। शुक्ला जी की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी कल्चर के खिलाफ अपना फैसला देते हुए सालों से सरकारी आवास पर जमे इस लोगों को आवास खाली करने के आदेश दिए। एसएन शुक्ला जैसे लोग समाज और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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