26 जनवरी का भव्य आयोजन पूरा हो चुका है। देशभक्ति के जब्जे से लबरेज हर भारतीय ने पूरे उत्साह से गणतंत्र दिवस पर तिरंगे को सलामी तो दी, लेकिन क्या तिरंगे प्रति ये सम्मान पूरे साल बना रहेगा? हमारा ये खास लेख राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर ही है, ताकि आगे कभी आपकी आंखों के सामने इसका अपमान न हो।
देश की शान तिरंगे के प्रति सम्मान हर भारतीय के अंदर होता ही है। लेकिन कई बार हम अनजाने में अपनी आंखों से तिरंगे का अपमान होता देखते हैं। 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर जैसे राष्ट्रीय पर्व के अगले दिन हमारी देशभक्ति पर तब सवाल उठते हैं जब सड़कों-गलियों पर कोई तिरंगा पड़ा हो और हम उसे देखकर भी आगे बढ़ जाते हैं।
हमारा झंडा चाहे जमीन पर धूल से सन रहा हो लेकिन फिर भी उसे अनदेखा किया जाता है। तब हमारा तिरंगे के प्रति सम्मान न जाने कहां चला जाता है। इन राष्ट्रीय पर्व से पहले सड़कों-दुकानों पर कपड़े से लेकर प्लास्टिक और कागज के बने खूब तिरंगे बिकते हैं। अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए हम बड़े शान से इन्हें खरीदते तो हैं लेकिन आयोजन के बाद इनका ख्लाल नहीं रखते। इस कारण ये सड़कों पर पड़े होते हैं।
कार्यक्रम के बाद झंडे का निस्तारण कैसे करना है इसको फ्लैग कोड ऑफ इंडिया-2002 में बखूबी बताया गया है। इसके अनुसार यदि राष्ट्रीय ध्वज खराब या क्षतिग्रस्त अवस्था में हो तो उसे नीजि तौर पर पूर्ण रूप से नष्ट कर दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के अनुसार उसे पूर्ण रूप से जलाकर या दफनाकर हम उसका निस्तारण कर सकते हैं। राष्ट्रीय ध्वज को जलाते वक्त ये ध्यान देना जरूरी है कि वो पूर्ण रूप से जल गया हो। आधा जला होना भी झंडे का अपमान है। इसके अलावा यदि हम उसे दफनाते हैं तो ये सुनिश्चित कर लें कि वो वापस जमीन पर न आने पाए। अर्थात झंडे को निश्चित गहराई में ही दफनाए। ऐसा करते वक्त झंडे को सलामी दीजिए या मौन रहिए।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 के अनुसार यदि कोई राष्ट्रीय ध्वज की बनावट बिगाड़ता है, उसे खराब या कुरूपित करता है, या किसी भी तरह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है तो उसे तीन साल की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। हम आशा करते हैं आगे से आप राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपना कर्तव्य अवश्य निभाएंगे और यदि कहीं तिरंगा गिरा मिले तो उसका उचित निस्तारण जरूर करेंगे।
सड़क पर ‘तिरंगा’ गिरा मिले तो क्या करते हैं आप?
