पाकिस्तान देश जो कि 1947 में हिन्दुओं से नफरत के तौर पर बना आज आतंकिस्तान के नाम से प्रख्यात हो चुका| अब इससे आगे बढ़ते हुए यह ” हरामखोर पाकिस्तान ” की संज्ञा प्राप्त कर चुका है जिसका कारण है – एक तो चोरी ऊपर से सीना ज़ोरी| आतंकियों की जन्मस्थली पाकिस्तान आज पूरी दुनिया में हरामखोरी का पर्याय बन कर उभर रहा है|
ताज़ा मामला देख कर आप भी कहेंगे – खुद ही आतंक फैलाये लेकिन लगाम लगाने में चोरी कर जाये : यही है हरामखोर पाकिस्तान|
हर साल सनकी आतंकी अफ़ज़ल गुरु की मौत पर भारत पे हमली साज़िश करने को उतारू जैश-ए-मोहम्मद के फ़र्ज़ी एवं बीमारू आका मसूद अज़हर को शह देने वाला हरामखोर पाकिस्तान एक तो अपनी कायर सेना और दोगली आईएसआई के दम पर आतंकियों के हमलो की श्रृंख्ला तैयार करने पर चढ़ा रहता है लेकिन खुलकर वार करना तो उसे आज तक नहीं आया है| तभी तो आज तक चारो जंगो में उसे मात खानी पड़ी है लेकिन हरामखोर पाकिस्तान एक कुत्ते की दुम से भी बत्तर है जिसे काट भी दिया जाए तो सीढ़ी नहीं हो सकती है|
अपनी मिट्टी से संचालित होने वाले आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने के दबाव में पाकिस्तान ने एक बार फिर कुछ समूहों द्वारा भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साधने की कोशिश की है और अन्य संगठनों पर लगाम लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। पाकिस्तान सरकार के अभियोजन संगठनों की सूची में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा शामिल हैं, लेकिन बाद के राजनीतिक जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाया जाना बाकी है, हालांकि पाकिस्तान का दावा है कि सरकार संगठन पर नजर रखे हुए है।
जमात-उद-दावा से जुड़ा एक अन्य समूह फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन है, जो एक चैरिटी संगठन के रूप में काम करने का दावा करता है, और निगरानी में संगठनों की सूची में है। पाकिस्तान को प्रतिबंध को अधिसूचित करना बाकी है, हालांकि उसने 21 फरवरी, 2019 को एक प्रेस बयान जारी कर कहा था कि JuD और FIF पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हाफिज मोहम्मद सईद द्वारा स्थापित लश्कर-ए-तैयबा, भारत के खिलाफ 2001 के संसद हमले, 2006 मुंबई लोकल ट्रेन बम विस्फोट और 26/11 मुंबई नरसंहार सहित कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। समूह को 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले के दौरान जैश-ए-मोहम्मद द्वारा मदद की गई थी। सईद भारत में सबसे वांछित आतंकवादियों में से एक है।
21 फरवरी, 2019 को जारी प्रेस विज्ञप्ति, और “जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इन्सानियत संगठन प्रतिबंधित” शीर्षक से, आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने आज प्रधानमंत्री कार्यालय में अपनी बैठक में कहा राष्ट्रीय कार्य योजना की विस्तार से समीक्षा की। यह बैठक के दौरान अभियोजन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने के लिए तय किया गया था। यह आगे कहा गया कि जमात-दावा-दावा और फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन को आंतरिक मंत्रालय द्वारा अभियोजन संगठनों के रूप में अधिसूचित किया गया है। “
4 मार्च, 2019 को अद्यतन की गई संगठनों की सूची में 68 समूह शामिल हैं, जबकि चार अन्य निगरानी सूची में हैं और दो समूह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प संख्या 1267 के तहत सूचीबद्ध हैं, जिसे 15 अक्टूबर, 1999 को अपनाया गया था और कॉल अल-क़ायदा, ओसामा बिन लादेन और / या तालिबान से जुड़े व्यक्तियों, समूहों और संगठनों को कवर करने के लिए एक प्रतिबंध के लिए शासन।
अब हरामखोर पाकिस्तान से क्या उम्मीद कर भी सकते है ? एक तरफ तो वह कहता है कि वह खुद आतंकवाद झेलता दूसरी तरफ तो उसको खुद पालता है और तीसरी तरफ वह उस पर लगाम लगाने के बहाने अपने ही कहे कृत पर चोरी कर जाता है|