प्रातः काल का मंत्र- आभारी बनें, सफल बनें।

आभारी

आभारी होना या कृतज्ञ होना, एहसानमंद होना सकारात्मक सोच की शुरुआत है। हर सुबह अगर हम अपने स्थिति के ऊपर, अपने उपलब्धि के ऊपर, और अपने लोगों के प्रति आभारी रहें तो हम अपने जीवन में आश्चर्यजनक रूप से सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

आधुनिक मनोवैज्ञानिक रिसर्च यह बताता है कृतज्ञ होना अपने आप में एक सकारात्मक बदलाव होता है। हमारे पास जो भी है उसके लिए हम पहले से ही आभारी रहे। हमारे पास जो भी समय है उसके लिए हम कृतज्ञ हों। हमारे पास जो भी उपलब्धि है उसके लिए हम आभारी रहे। हमारे पास जो भी लोग हैं उनके प्रति हम एहसानमंद रहे तो हम अपने पक्ष में अपनी सहायता के लिए एक अच्छी स्थिति का निर्माण करते जाते हैं।

लखनऊ के प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डॉ आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है की आभारी होने मात्र से हम नकारात्मक भावनाओं से बाहर निकल जाते हैं और सफलता की तरफ अग्रसर होने लगते हैं।

मन में कृतज्ञता की भावना होने से हम कामयाबी को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। हर सुबह हम अपनी चीजों के प्रति, अपने परिवार के प्रति, अपने समय के प्रति आभारी रहे, अपने दोस्तों के प्रति कृतज्ञ रहें, जीवन में जो भी मिलता है उससे उसके प्रति एहसानमंद रहे, तो हमारा आने वाला समय भी हमारे लिए और अधिक कामयाबी दिलाएगा।

दुनिया के जाने-माने वक्ताओं ने यह कहा है कि हम प्रातः काल कृतज्ञ होने का, और आभारी होने का संकल्प लें तो हम अपने जीवन में आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन कर सकते हैं। अतः आज से ही सोच ले कि हम आभारी बनने की आदत डालें। हम कृतज्ञ बने।

आज की संस्कृति में कृतज्ञ होने का प्रचलन नहीं है लेकिन हमें यह डालना चाहिए हमें यह आदत डालनी चाहिए हमें नई शुरुआत करनी चाहिए।

Amit Srivastava

IIT Bombay & JNU alumnus, Hindu, Student of Ved and heritage of Bharat, Thinker and Executor, Participant and Observer, interested in social work and politics, writes on Self-help, personal development and societal awareness.

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