यदि कम उम्र में लेखक बनना चाहते हैं तो ये बातें रखिए याद | Youth Express

Tuesday 22nd of January 2019

यदि कम उम्र में लेखक बनना चाहते हैं तो ये बातें रखिए याद



लिखना, पढ़ना और बोलना मनुष्य की नैसर्गिक प्रतिभा है उसकी आत्मिक कला है। सामान्य मानवीय गुण हैं। अक्सर कहा जाता है कि यदि आप जानते हो कि कब, कहाँ और क्या बोलना है तो आप अपने जीवन में एक चैंपियन बन सकते हैं। अक्सर छोटे बच्चे या युवाओं में जिनकी बहुत उम्र नहीं है, पढने-लिखने के लिहाज से वे थोड़े छौने हैं। अभी इस सांसारिक लिहाज से काफी कच्चे हैं, उनमें लिखने का नया-नया चाव, जोश, जुनून आता है। लेकिन कई बार यह देखने या सुनने को मिलता है विशेषकर बड़े लोगों द्वारा कि जिन्हें पढना चाहिए था वे लिख रहे हैं। इस तरह की बातें अक्सर ही किसी साहित्यिक सभा या किन्हीं बड़े शायर या साहित्यकार से सुनने को मिलती हैं। जो बहुत हद तक इन नये-नवेलों को हतोत्साहित करती हैं, उनका मनोबल कमजोर करती हैं!! कम उम्र में लेखक या लिखने वालों पर किए जाने वाले इस कटाक्ष “जिन्हें पढना चाहिए था वो लिख रहे हैं, या ये कि हर कोई लिखना चाहता है, पढना नहीं”!! इसके सीधे तथ्यात्मक जवाब कुछ इस प्रकार हैं। भारतीय हिन्दी साहित्य के बहुतेरे साहित्यकारों के नाम इस सूची में सूचीबद्ध किए जा सकते हैं जिन्होनें लेखन कार्य बहुत ही कम उम्र में प्रारंभ किया।।

कम उम्र में लेखक बनने के लिए ये तथ्य रखें ध्यान –


भारतीय हिन्दी साहित्य के बहुतेरे कम उम्र में लेखक साहित्यकारों के नाम सूचीबद्ध किए जा सकते हैं, जिन्होनें लेखन कार्य बहुत ही कम उम्र में प्रारंभ किया।।

कम उम्र में लेखक


1.) – भारतेंदु हरिश्चन्द्र ( 16 वर्ष की आयु में बंगला से हिंदी में नाटक का अनुवाद, 18 वर्ष की आयु में कविवचन सुधा पत्रिका का प्रकाशन, कुल आयु 35 वर्ष)
2.) – बशीर बद्र (11 वर्ष की आयु में ग़ज़ल व शेर लिखने की शुरुआत)
3.) – प्रताप नारायण मिश्र (मात्र 38 वर्ष के जीवन काल में आधुनिक युग के प्रवर्तक, भारतेंदु के समकक्ष)
4.) – प्रेमचंद ( 16 वर्ष की आयु में लेखन आरम्भ, हिंदी साहित्य के उद्धारक)
5.) – आचार्य रामचंद्र शुक्ल (18 वर्ष की आयु में निबन्ध विधा का सूत्रपात किया जो 1904 में सरस्वती में छपा)
6.) – श्रीधर पाठक (18वर्ष की आयु से लेखन आरम्भ)
7.) – मैथिली शरण गुप्त (16 वर्ष की आयु में लिखना आरम्भ, 20 की उम्र में सरस्वती में रचनाएँ छपने लगी)
8.) – जयशंकर प्रसाद ( 16 वर्ष की आयु में लेखन आरम्भ, 23 वर्ष की आयु में कविता संग्रह ‘काननकुसुम) प्रकाशित)
9.) – सुमित्रानंदन पन्त(18 वर्ष की आयु में लेखन आरम्भ, 22 वर्ष की आयु में कविता संग्रह ‘उच्छावास’ प्रकाशित)
10.) – धर्मवीर भारती ( लगभग 16 वर्ष की आयु में लेखन आरम्भ, 20 वर्ष की आयु में पहला कहानी संग्रह ‘मुर्दों का गाँव’, 23 वर्ष की आयु में उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’)


यह मात्र 10 साहित्यकारों के नाम गिनाये है। आदिकाल से वर्तमान तक हजारों ऐसे कवि और लेखक हुए हैं जिन्होंने 16 या उससे भी कम उम्र में लेखक या लिखना आरम्भ कर दिया था।

कम उम्र में लेखक

निष्कर्ष:-

निष्कर्षतः मैं इस नतीजे पर पहुँचता हूँ कि साहित्यकार बनते नहीं हैं बल्कि वे पैदा होते हैं और साथ में यदि अध्ययन भी हो तो वह और सर्वोत्तम है। इसलिए जो लोग कम उम्र में लेखक बनना चाहते हैं या जो लोग जबरदस्ती में साहित्यकार बनना चाहते हैं तो उन्हें भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि काव्यशास्त्र में कहा गया है कि कला दो तरह से प्राप्त होती है – पहली जन्मजात और दूसरी अभ्यास से, तो आप अभ्यास कीजिये और कोई कम उम्र में लेखक बनना चाहता हैं एवं वह लिख रहा है या पढ़ रहा है उसके क्षेत्र में हस्तक्षेप करने से खुद को रोकिये!!

हर व्यक्ति सब कुछ नहीं पढ सकता, जो जितना पढ़ रहा है, उस स्तर पर लिखने और सुधारने का प्रयास कर रहा है। उसे अपमानित या नीचा मत साबित कीजिए अपनी कुंठा का इतना वीभत्स रूप मत दिखलाइए!!


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Deepak Tenguriya
Author:

Political Science Department. ARSD College (Delhi University). Debater, Poet and Content Writer.

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